17 साल बाद मालेगांव ब्लास्ट केस पर फैसला आज, साध्वी प्रज्ञा समेत 7 आरोपी कोर्ट में होंगे पेश

Sandesh Wahak Digital Desk: महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में हुए बम विस्फोट मामले पर आज (गुरुवार) एनआईए की विशेष अदालत अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाएगी। इस धमाके में छह लोगों की जान चली गई थी, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।

इस मामले में बीजेपी नेता और पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित समेत सात लोगों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा चलाया गया। अन्य आरोपियों में मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी शामिल हैं।

2008 में मस्जिद के पास हुआ था धमाका

29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास खड़ी मोटरसाइकिल में रखा विस्फोटक फट गया था। धमाके में छह लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने की और अदालत से आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की।

2018 में शुरू हुई सुनवाई, इस साल अप्रैल में पूरी हुई

इस केस की सुनवाई 2018 में शुरू हुई और 19 अप्रैल 2025 को पूरी हुई। अदालत ने तब से फैसले को सुरक्षित रखा था। एनआईए का कहना है कि यह साजिश मुस्लिम समुदाय में डर का माहौल पैदा करने, साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने और राज्य की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए रची गई थी।

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के वकील जेपी मिश्रा ने कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि 31 जुलाई को सत्य की जीत होगी। इस केस में झूठे सबूत पेश किए गए थे, लेकिन सत्य को कभी छिपाया नहीं जा सकता। निर्दोष लोगों को जरूर न्याय मिलेगा।”

केस में देरी क्यों हुई?

वकील जेपी मिश्रा के अनुसार, शुरुआत में महाराष्ट्र एटीएस ने 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने इनमें से पांच को डिस्चार्ज कर दिया। तीन आरोपियों को पूरी तरह से और दो को आंशिक रूप से राहत दी गई। राकेश धावड़े और जगदीश चिंतामणि मातरे के खिलाफ आर्म्स एक्ट के मामले पुणे और कल्याण सेशन कोर्ट में ट्रांसफर कर दिए गए।

वर्तमान में सात आरोपी, जिनमें साध्वी प्रज्ञा और लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित शामिल हैं, मुकदमे का सामना कर रहे हैं। अदालत ने सभी आरोपियों को 31 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है। यदि किसी को दोषी पाया जाता है, तो तुरंत हिरासत में लेकर सजा सुनाई जाएगी।

 

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