यूपी GST विभाग में 200 करोड़ का बेनामी जमीन घोटाला, 50 अधिकारी फंसे, जांच के आदेश
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के स्टेट जीएसटी विभाग के लगभग 50 अधिकारी एक बड़े भूमि घोटाले में जांच के घेरे में आ गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन अधिकारियों ने करीब ₹200 करोड़ रुपये की नामी और बेनामी संपत्तियों में निवेश किया है। आशंका है कि यह धनराशि कोरोना काल के दौरान अवैध तरीके से अर्जित की गई थी, जिसे बाद में रियल एस्टेट में लगाया गया।
मोहनलालगंज में चर्चित बिल्डर के ज़रिए की गई ज़मीन खरीद
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब अवध क्षेत्र के एक जिले से एक प्रसिद्ध बिल्डर के माध्यम से मोहनलालगंज तहसील की ज़मीनों में बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त की शिकायत सरकार तक पहुंची। प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद विस्तृत जांच के आदेश दिए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकांश निवेश लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में एक चर्चित बिल्डर के माध्यम से किया गया।
अब तक 11 अधिकारियों के नाम सामने आ चुके हैं, जिनके नाम पर करोड़ों रुपये की ज़मीन दर्ज है। इनमें सहायक आयुक्त, उपायुक्त, संयुक्त आयुक्त और अपर आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं। ये अधिकारी विशेष रूप से गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी और मेरठ जैसे प्रमुख जिलों में ‘सचल दल’ और ‘विशेष जांच विंग (SIB)’ जैसे प्रभावशाली पदों पर तैनात रहे हैं।
कोरोना काल बना भ्रष्टाचार का माध्यम
विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2020 में शुरू हुआ कोरोना काल इन अधिकारियों के लिए ‘काली कमाई’ का अवसर बन गया। उस समय स्थानांतरण पर रोक या धीमी प्रक्रिया के कारण कई अधिकारी वर्षों तक एक ही स्थान पर तैनात रहे, जिससे उन्होंने अवैध रूप से बड़ी धनराशि अर्जित की। इस धन को वैध रूप से निवेश करने के लिए उन्होंने रियल एस्टेट का सहारा लिया।
सूत्रों का यह भी कहना है कि जिस बिल्डर के माध्यम से यह धन खपाया गया, वह एक वरिष्ठ जीएसटी अधिकारी का करीबी रिश्तेदार है। उसी अधिकारी ने बिल्डर को विभाग में संपर्क दिलवाया और अवैध धन को ज़मीनों में निवेश करने की सुविधा उपलब्ध कराई। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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