लखनऊ RTO में 320 कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार, ‘दलाल रैकेट’ का पर्दाफाश करने की तैयारी

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) समेत प्रदेश भर के सभी आरटीओ/एआरटीओ कार्यालयों में तैनात स्मार्ट चिप कंपनी के लगभग 320 कर्मचारियों को बाहर करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस निर्णय से ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने और प्रिंटिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आवेदकों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

आरटीओ प्रशासन की दलील: दलाल-सांठगांठ

ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ (प्रशासन) संजय तिवारी ने इस संबंध में परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को पत्र लिखकर कर्मचारियों को हटाने की मांग की है। आरटीओ प्रशासन की दलील है कि ये कर्मचारी पिछले कई वर्षों से एक ही जगह पर तैनात हैं, जिसके कारण उनकी दलालों से सांठगांठ हो गई है। यह कदम भ्रष्टाचार और दलालों के रैकेट पर नकेल कसने के लिए उठाया जा रहा है। पूरे प्रदेश में 320, जबकि लखनऊ में 28 कर्मचारी प्रभावित होंगे।

कर्मचारियों का विरोध और पलटवार

कंपनी के कर्मचारी इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं और इसे निराधार आरोप बता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें पहले से ही महज ₹10-12 हज़ार का वेतन मिलता है, ऐसे में नौकरी से हटाने पर उनके सामने जीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। लखनऊ सहित प्रदेश भर के कर्मचारी जल्द ही परिवहन आयुक्त किंजल सिंह से मिलकर अपनी बात रखने की तैयारी में हैं, और आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है।

कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। वे परिवहन आयुक्त को आरटीओ में सक्रिय दलालों की जानकारी, तस्वीरें और वीडियो भी सौंपने की तैयारी में हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल से ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया, बायोमेट्रिक और डीएल वितरण का काम सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है।

 

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