यूपी के 771 निर्माण श्रमिकों को मिला 2.68 करोड़ का ‘तोहफा’, पेंशन बनी बुढ़ापे की लाठी
Sandesh Wahak Digital Desk/Chetan Gupta: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज का दिन उन हाथों के लिए खास रहा, जो ईंट-पत्थर जोड़कर दूसरों के लिए आशियाने बनाते हैं। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) ने अपनी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत श्रमिकों को बड़ी सौगात दी है। एक भव्य कार्यक्रम में महात्मा गांधी पेंशन योजना और अन्य योजनाओं के तहत 771 निर्माण श्रमिकों के खातों में 2 करोड़ 68 लाख 70 हजार रुपये की धनराशि सीधे (DBT) ट्रांसफर की गई।

पंजीकरण ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी: अनिल राजभर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि “वर्तमान में बोर्ड के पास लगभग 1.89 करोड़ श्रमिक पंजीकृत हैं, लेकिन यह आंकड़ा अभी काफी नहीं है। प्रदेश का हर वो हाथ, जो निर्माण कार्य में लगा है, उसे सरकारी सुरक्षा चक्र का हिस्सा होना चाहिए।”
उन्होंने श्रमिकों से आग्रह किया कि वे अपने साथ काम करने वाले अन्य साथियों को भी पंजीकरण के लिए प्रेरित करें। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को न केवल आर्थिक मदद, बल्कि सामाजिक सम्मान दिलाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

शिक्षा और भविष्य पर जोर: अटल आवासीय विद्यालय
प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन, एमके शण्मुगा सुंदरम ने इस मौके पर श्रमिकों के बच्चों के भविष्य पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “अटल आवासीय विद्यालय” योजना बोर्ड की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है। यहाँ श्रमिकों के बच्चों को न केवल मुफ्त शिक्षा मिल रही है, बल्कि उनके रहने और सर्वांगीण विकास की भी उत्तम व्यवस्था है। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए इन विद्यालयों में अधिक से अधिक आवेदन करें।
जन्म से लेकर बुढ़ापे तक, सरकार का साथ
बोर्ड की सचिव पूजा यादव ने योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बोर्ड श्रमिकों के साथ उनके जीवन के हर मोड़ पर खड़ा है।
शुरुआत: बच्चे के जन्म से ही आर्थिक सहायता शुरू हो जाती है।
शिक्षा व स्वास्थ्य: बच्चों की पढ़ाई और श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए निरंतर बजट दिया जाता है।
बुढ़ापा: जब 60 वर्ष की आयु के बाद श्रमिक काम करने में असमर्थ हो जाता है, तो ‘महात्मा गांधी पेंशन योजना’ उसके लिए एक नियमित आय का स्रोत बनती है।
विपदा: दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में भी परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाता।

डिजिटल हुई श्रमिक सेवाएं
श्रमायुक्त मार्कंडेय शाही ने बताया कि नए लेबर कोड के तहत अब श्रमिक सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि श्रमिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसी कड़ी में ‘उत्तर प्रदेश सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ के नए लोगो और वेबसाइट के आधुनिक डिजिटल स्वरूप का भी अनावरण किया गया।
सुशासन और जीरो टॉलरेंस का असर
यह कार्यक्रम केवल धनराशि के वितरण का माध्यम नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि सरकार श्रमिकों के पसीने की कीमत समझती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि योजनाओं का लाभ सीधा लाभार्थी के बैंक खाते में भेजने से भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई है और ‘सुशासन’ का लाभ सीधे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है।
कार्यक्रम में विशेष सचिव नीलेश कुमार सिंह समेत विभाग के कई आला अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
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