UP Politics: BSP में बढ़ी सियासी हलचल, मायावती की पांच शर्तों ने पार्टी में मचाई खलबली
Sandesh Wahak Digital Desk: हाल ही में बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी ने बाहर कर दिया था। इसके बाद से पार्टी में सियासी घमासान छिड़ा हुआ है। अब इसको मायावती भी एक्टिव मोड में आ गई हैं। मायावती ने एक के बाद एक ट्वीट करके इशारों ही इशारों में बिना नाम लिए अशोक सिद्धार्थ पर निशाना साधा है।
मायावती के एक ट्वीट ने बीएसपी में खलबली पैदा कर दी है। मायावती ने उत्तराधिकारी को लेकर एक के बाद एक पांच पोस्ट किए। कांशी राम द्वारा स्थापित इस राजनीतिक दल के उत्तराधिकारी को लेकर मायावती ने पांच शर्तें रखी दी है। तो वहीं दूसरी ओर मायावती की इन पांच शर्तों के बाद आकाश आनंद के उत्तराधिकारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि मायावती के भतीजे आकाश आनंद को ही बीएसपी का उत्तराधिकारी समझा जा रहा है। फिर बी बसपा सुप्रीमों की शर्तों ने फिर से आकाश के उत्तराधिकारी को लेकर संदेहास्पद कर दिया है।
क्या हैं मायावती की पांच शर्तें?
1. बीएसपी, देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ को सत्ता तक पहुँचाने हेतु, मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा सब कुछ त्यागकर स्थापित की गई पार्टी व मूवमेन्ट, जिसमें स्वार्थ, रिश्ते-नाते आदि महत्वहीन अर्थात बहुजन-हित सर्वोपरि है।
2. इसी क्रम में मान्यवर श्री कांशीराम जी की शिष्या व उत्तराधिकारी होने के नाते उनके पदचिन्हों पर चलते हुए मैं भी अपनी आखिरी सांस तक हर कुर्बानी देेकर संघर्ष जारी रखूंगी ताकि बहुजन समाज के लोग राजनीतिक गुलामी व सामाजिक लाचारी के जीवन से मुक्त होकर अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
3. अतः मान्यवर कांशीराम जी की तरह ही मेरे जीतेजी भी पार्टी व मूवमेन्ट का कोई भी वास्तविक उत्तराधिकारी तभी जब वह भी, कांशीराम जी के अन्तिम सांस तक उनकी शिष्या की तरह, पार्टी व मूवमेन्ट को हर दुःख-तकलीफ उठाकर, उसे आगे बढ़ाने में पूरे जी-जान से लगातार लगा रहे।
4. साथ ही, देश भर में बीएसपी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी पार्टी प्रमुख द्वारा निर्देश, निर्धारित अनुशासन एवं दायित्व के प्रति पूरी निष्ठा व ईमानदारी से जवाबदेह होकर पूरे तन, मन, धन से लगातार काम करते रहना ज़रूरी है।
5. इसी ज़िम्मेदारी के साथ ख़ासकर कैडर के बल पर, ज़मीनी स्तर पर पार्टी संगठन की मज़बूती व सर्वसमाज में जनाधार को बढ़ाने के साथ ही आगे भी हर चुनाव की तैयारी में पूरी दमदारी के साथ लगना है ताकि बहुजन समाज की एकमात्र आशा की किरण बीएसपी को अपेक्षित व प्रतीक्षित सफलता मिल सके।

