लद्दाख कोई आम जगह नहीं, बल्कि आत्मा को छू लेने वाला अनुभव है: सांसद जगदंबिका पाल
Sandesh Wahak Digital Desk: देश की सीमाओं पर बसे शांत, सुंदर और प्रकृति की गोद में समाए लद्दाख की वादियां किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं। इसी अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखने का सौभाग्य सोमवार को भारत की लोकसभा की संसदीय ऊर्जा समिति के 15 सांसदों को मिला। इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल सांसद जगदंबिका पाल ने पैंगोंग झील के अलौकिक नज़ारों को देखकर इसे “आत्मा को छू लेने वाला अनुभव” बताया।
14,000 फीट की ऊंचाई पर बसी झील, प्रकृति का अद्भुत चमत्कार
पैंगोंग झील लद्दाख की उन नायाब रत्नों में से एक है जो लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। करीब 134 किलोमीटर लंबी यह झील भारत और चीन की सीमा को छूती है। इसकी खासियत यह है कि दिन के अलग-अलग समय पर इसका रंग बदलता है—कभी नीला, कभी हरा, और कभी सुनहरा। झील के शांत जल, बर्फ से ढके पहाड़ और ठंडी हवाओं ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
डुमरियागंज से सांसद जगदंबिका पाल ने सन्देश वाहक न्यूज़ से विशेष बातचीत में कहा, “यह सौभाग्य मुझे जनपद सिद्धार्थनगर के देवतुल्य जनता के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ है। मैं उनके प्रति आजीवन आभारी हूं।” उन्होंने कहा कि लद्दाख का यह दौरा केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक और सांस्कृतिक अनुभव है। उन्होंने आगे बताया कि यह झील जितनी खूबसूरत है, उतना ही शांत और मन को सुकून देने वाला इसका वातावरण है।
आम जनता से की अपील
सांसद पाल ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा “अगर आपको कभी मौका मिले तो ज़रूर लद्दाख की वादियों और पैंगोंग झील का दौरा कीजिए। यह केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आत्मा को छू लेने वाला अनुभव है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।”
सांसद पाल ने यह भी कहा कि इतनी दुर्लभ और सुंदर विरासत की सुरक्षा हमारा दायित्व है। उन्होंने सरकार और पर्यटकों से आग्रह किया कि वे लद्दाख की शुद्धता और सौंदर्य को बनाए रखें।
रिपोर्ट: जाकिर खान
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