UP BJP: ओबीसी को कमान मिलना तय, योगी-केशव में कौन पड़ेगा भारी!
Sandesh Wahak Digital Desk: भाजपा ऐसा सियासी दल हैं। जहां सामने जो दिखता है। अधिकांश मामलों में उसका जमीनी सच पर्दे के पीछे कुछ और ही रहता है। कुछ इसी अंदाज में कयासबाजी का दौर यूपी भाजपा के नए अध्यक्ष के नाम को लेकर जारी है।

दोनों दिग्गजों के सुझाये नामों पर छिड़ी रार
मिशन 2027 के लिए प्रदेश भाजपा को पिछड़े वर्ग (ओबीसी) से नया मुखिया मिलना लगभग तय माना जा रहा है। सिर्फ चयन में सिक्का सीएम योगी आदित्यनाथ का चलेगा या डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का, असली रार इस पर छिड़ी है। देखना लाजिमी होगा कि शीर्ष नेतृत्व के स्तर से ऊंट आखिर किस करवट बैठता है। प्रदेश भाजपा के नए मुखिया के तौर पर सियासी गलियारों में डिप्टी सीएम केशव मौर्य का नाम शीर्ष पर है। कारण भी वाजिब है।

भाजपा के चाणक्य गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से हालिया मुलाकातों के जरिये जो सियासी इबारत लिखी जा रही है। उसे हर कोई डिकोड करना चाहता है। सपा के पीडीए दांव की काट भाजपा ओबीसी को मानती है। इसलिए प्रदेश भाजपा के मुखिया के खांचें में ओबीसी चेहरा ही फिट बैठेगा।

भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक केशव मौर्य ने शीर्ष नेतृत्व के सामने केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का नाम यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के लिए सुझाया है। वर्मा भी सांगठनिक जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं। मौर्य के हालिया दिल्ली दौरे इसी का हिस्सा हैं।

वहीं भरोसेमंद सूत्रों की माने तो सीएम योगी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के पद पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को बिठाना चाहते हैं। उनके पास संगठन का खासा अनुभव भी है।

फिर दोनों डिप्टी सीएम बनेंगे संगठन का हिस्सा
भाजपा से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों ने कहा कि हालिया सियासी घटनाक्रम के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष के पद पर शीर्ष नेतृत्व द्वारा डिप्टी सीएम केशव मौर्य की ताजपोशी से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन ऐसा होने पर सिर्फ केशव ही नहीं बल्कि दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी यूपी सरकार से संगठन का हिस्सा बनेंगे। इसके बाद मिशन 2027 के लिए यूपी में डिप्टी सीएम के दोनों पदों के लिए दलित और ब्राह्मण चेहरा तलाशा जाएगा। भाजपा के भीतर सियासी गहमागहमी तेज है।

प्रदेश संगठन की पहली पसंद केशव
प्रदेश संगठन नये मुखिया के तौर पर केशव मौर्य को देखना चाहता है। कारण उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते 2017 वि. चुनाव में ओबीसी वोटबैंक का भाजपा में भरोसा दिखाना था। इसी भरोसे ने वोटों में तब्दील होकर भाजपा की सरकार बनायी। केशव की कुशल सांगठनिक क्षमता किसी पहचान की मोहताज नहीं है।

…कमान संभाली तो कोई बड़ा समझौता बनेगा कारण
सूत्रों के मुताबिक पिछली बार डिप्टी सीएम केशव मौर्य को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपते समय जो आश्वासन शीर्ष नेतृत्व की तरफ से दिया गया था। वो पूरा नहीं किया गया। उनकी सांगठनिक मेहनत भी नजरअंदाज हुई। इसलिए मौर्य का इरादा अंदरखाने से पुन: प्रदेश भाजपा संगठन का मुखिया बनने का कतई नहीं है। बावजूद इसके, अगर मौर्य ही दिल्ली दरबार की तरफ से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाये जाते हैं तो पीछे कोई बड़ा समझौता भी होना तय है।
Also Read: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू, 14 अगस्त से शुरू होगा घर-घर सर्वे

