राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किए चार नए चेहरे, उज्ज्वल निकम और हर्षवर्धन श्रृंगला भी शामिल

Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार नई हस्तियों को मनोनीत किया है। ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए पहचाने जाते हैं। जिन नामों की घोषणा हुई है, उनमें प्रमुख हैं जाने-माने वकील उज्ज्वल निकम, पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, इतिहासकार डॉ. मीनाक्षी जैन और केरल के सामाजिक कार्यकर्ता सी. सदानंदन मास्टर।

कौन हैं ये चार नामित सदस्य?

उज्ज्वल निकम देश के प्रमुख आपराधिक मामलों में सरकारी वकील रह चुके हैं। 26/11 मुंबई हमले से लेकर कई हाई-प्रोफाइल केस में उन्होंने सरकार का पक्ष प्रभावशाली तरीके से रखा है। उनकी छवि एक निर्भीक और न्यायप्रिय वकील की रही है।

हर्षवर्धन श्रृंगला भारत के विदेश सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। विदेश नीति और कूटनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

डॉ. मीनाक्षी जैन इतिहास की प्रख्यात प्रोफेसर और लेखिका हैं। भारतीय संस्कृति और इतिहास पर उनके शोध कार्यों को खूब सराहा गया है। वे अकादमिक क्षेत्र में एक विश्वसनीय नाम मानी जाती हैं।

सी. सदानंदन मास्टर केरल के समाजसेवी हैं और शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है। वे स्वयं राजनीतिक हिंसा के शिकार रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सामाजिक सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा।

अनुच्छेद 80 के तहत हुआ नामांकन

इन चारों हस्तियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राज्यसभा में मनोनीत किया गया है। संविधान की इस व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति उन्हें उच्च सदन में भेज सकते हैं, जिन्होंने साहित्य, विज्ञान, कला या सामाजिक सेवा में विशेष योगदान दिया हो। राज्यसभा की 12 सीटें ऐसी होती हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है, ताकि ऐसे लोग भी संसद का हिस्सा बन सकें जो आम चुनाव के ज़रिए नहीं आ पाते।

पहले भी कई हस्तियां हो चुकी हैं मनोनीत

आजादी के बाद से अब तक कई जानी-मानी हस्तियों को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा भेजा जा चुका है। इनमें लता मंगेशकर, एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी, सचिन तेंदुलकर, रेखा, रवींद्र जैन, और जाकिर हुसैन जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी ने अपने अनुभव और दृष्टिकोण से संसद को समृद्ध किया है।

इन चारों नामों के जरिए यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को संसद की आवाज़ बनाने की दिशा में गंभीर है। संसद में इनका अनुभव और दृष्टिकोण निश्चित रूप से नीतियों और विमर्श को नई दिशा देगा।

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