‘स्क्रिप्ट तैयार थी, कैमरा ऑन था’, अखिलेश यादव ने स्कूल का वीडियो शेयर कर कही ये बात
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश सरकार की स्कूल मर्जर नीति को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। इसी बीच महराजगंज के रुद्रपुर भलुही गांव में बच्चों के रोने का एक भावुक वीडियो वायरल हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। हालांकि प्रशासन की जांच में इस वीडियो को स्क्रिप्टेड और भ्रामक पाया गया।
अखिलेश यादव ने उठाया मुद्दा, वीडियो वायरल कर सरकार पर बोला हमला
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा कि “जिन्होंने ‘बच्चों’ की आँखों में आँसू दिए, वो ख़ुदगर्ज़ जीते हैं बस ख़ुद के ही लिए…”
जिन्होंने ‘बच्चों’ की आँखों में आँसू दिए
वो ख़ुदगर्ज़ जीते हैं बस ख़ुद के ही लिए pic.twitter.com/VKoc8cUGft— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 21, 2025
वीडियो में कुछ बच्चे स्कूल के गेट पर रोते-बिलखते नजर आते हैं और गेट खोलने की गुहार लगाते हैं। बच्चे कह रहे हैं “मैडम जी गेट खोल दो… हम यहीं पढ़ेंगे, कहीं और नहीं जाएंगे…”। इस दौरान स्कूल की प्रधानाध्यापिका कुसुमलता पांडेय भी भावुक होकर रोने लगती हैं।
जांच में हुआ खुलासा
बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ऋद्धि पांडेय की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में यह पाया गया कि वायरल वीडियो जानबूझकर स्क्रिप्ट किया गया था, जिसका उद्देश्य सरकार की स्कूल मर्जर नीति का विरोध करना और प्रशासन की छवि को धूमिल करना था।
प्राथमिक विद्यालय रुद्रपुर भलुही की प्रधानाध्यापिका पर बच्चों को बरगलाकर रोने के लिए मजबूर करने और वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाने का आरोप साबित हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है। साथ ही संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
स्कूल को किया गया था बंद?
इस मामले पर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, रुद्रपुर भलुही का प्राथमिक विद्यालय अभी भी पहले की तरह संचालित हो रहा है। उसे मर्जर नीति के तहत किसी अन्य स्कूल में ट्रांसफर नहीं किया गया है। वायरल वीडियो पूरी तरह से मनगढ़ंत और प्रायोजित है। प्रशासन की छवि खराब करने की मंशा से इसे फैलाया गया। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल में मिलीं कई अनियमितताएं
- जांच के दौरान स्कूल में कई गंभीर खामियां भी सामने आईं।
- विद्यालय में नामांकन सिर्फ 32 छात्रों का था, लेकिन प्रधानाध्यापिका ने नामांकन बढ़ाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए।
- ग्राम प्रधान और स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रधानाध्यापिका की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
- स्कूल में आवश्यक पंजीकाएं और गतिविधि सामग्री जैसे – कंपोजिट ग्रांट, स्पोर्ट्स अनुदान, टीएलएम, लर्निंग कॉर्नर, बाल मेला, माता उन्मुखीकरण, “हमारा आंगन हमारे बच्चे”, प्रिंट रिच मैटेरियल, वार्षिक उत्सव, आदि अनुपलब्ध पाए गए।
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