संदेश वाहक के 20 वर्ष: जनसरोकार हमारा लक्ष्य

आपका अपना अखबार ‘संदेश वाहक’ पत्रकारिता के निर्धारित मानदंडों और आदर्शों पर चलते हुए आज 19 वर्ष पूर्ण कर 20वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। करीब दो दशकों का यह सफर सुधी पाठकों के प्रेम और सहयोग के बिना संभव नहीं था। इस शुभ अवसर पर ‘संदेश वाहक’ की टीम अपने पाठकों का न केवल तहेदिल से अभिनंदन करती है बल्कि सहयोग और प्यार देने के लिए धन्यवाद भी देती है।

पत्रकारिता लोकतंत्र का न केवल चौथा स्तंभ है बल्कि यह हर पीडि़त व वंचित की आवाज भी है। यह सरकार और जनता के बीच पुल का काम करती है। अपने जन्म से ही पत्रकारिता ने अपने मूल्य, आदर्श और अनुशासन खुद गढ़े हैं और इस पर आगे बढ़ी। जनसरोकार उसके केंद्र में रहा है। यह हर उस अन्याय के खिलाफ खड़ी रहती है जो जनहित के विरुद्ध होता है। जनता के हक की लड़ाई में खुद को सबसे आगे रखती है। आज के दौर में जब पत्रकारिता विचारधाराओं के मकडज़ाल में फंस गयी है, ‘संदेश वाहक’ पिछले 19 वर्षों से पत्रकारिता के मूल्यों और आदर्शों का दामन थामकर, तमाम विरोधाभासों को दरकिनार कर जनता की आवाज बुलंद कर रहा है। कानून व्यवस्था का सवाल हो या भ्रष्टाचार का मामला या कोई अन्य मुद्दा, ‘संदेश वाहक’  हर सुबह सच के साथ आपके सामने होता है। खबरों में एंगल नहीं बल्कि तथ्यों को परोसता है ताकि पाठक खुद सही-गलत का फैसला ले सकें। तटस्थता और सत्यनिष्ठा हमारी पहचान है और यही पत्रकारिता का उसूल भी। हम इसी डोर से बंधे हैं और एंगल वाली खबरों की लाइन से हटकर सच का परचम फहराने की कोशिश जारी रखे हुए हैं।

 

संदेश वाहक’ सिर्फ खबर नहीं बल्कि इसके पीछे की खबर की भी खबर रखता है। जनहित के मुद्दे पर सरकार व प्रशासन से तीखे सवाल पूछता है। घटनाओं का सटीक विश्लेषण हमारा लक्ष्य है और सच इसका केंद्र बिंदु। सच के प्रति जुनून, खोजी खबरें और तीखे तेवर ‘संदेश वाहक’ की पहचान हैं। यही वजह है कि ‘संदेश वाहक’ न केवल बेहद लोकप्रिय है बल्कि पत्रकारिता जगत में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है। आज जब पत्रकारिता में जन-सरोकार के मुद्दे करीब-करीब नदारद हो चुके हैं, हमारा प्रयास इसकी मशाल को जलाए रखने का है ताकि हाशिए में खड़े व्यक्ति की आवाज सत्ता के शिखर तक पहुंचती रहे, सरकारें उनके हितों पर गौर करें और उनकी समस्याओं का समाधान करें। हम अपने प्रयास में काफी हद तक सफल भी रहे हैं। यह सही है कि पत्रकारिता में दो दशक काफी नहीं होता है लेकिन यदि नीयत अच्छी , लक्ष्य स्पष्ट और राह आदर्शवादी हो तो ये प्रयास भी मील के पत्थर से कम नहीं होते। पत्रकारिता की इसी थाती को बचाने की हमारी कोशिश है। इसमें कोई शक नहीं कि ऐसा हम अपने सुधी पाठकों के सहयोग और प्यार के कारण कर पा रहे हैं। उनका हमारे ऊपर लगातार बढ़ता विश्वास हमारे हौसलों को उड़ान देता है और बेहतर करने की प्रेरणा का स्रोत बनता है।

आशा है ‘संदेश वाहक’ को अपने सुधी पाठकों का पहले से अधिक सहयोग व प्यार मिलेगा। इस शुभ अवसर पर हम अपने पाठकों का एक बार फिर दिल की गहराइयों से शुक्रिया करते हैं।

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