मैनपुरी कोर्ट का बड़ा फैसला: मौत के बाद भी नहीं माफ होगा बिजली बिल, उत्तराधिकारियों से वसूली का रास्ता साफ
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक विशेष अदालत ने बिजली चोरी के एक मामले में ऐसा निर्णय दिया है जो भविष्य में ऐसे विवादों के निपटारे के लिए मिसाल बन सकता है। स्पेशल जज (ईसी एक्ट) राकेश पटेल की अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी आरोपी की मुकदमा चलने के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो आपराधिक कार्यवाही तो समाप्त होगी, लेकिन बिजली विभाग उसके उत्तराधिकारियों से बकाया राशि की वसूली कर सकता है।
मामला क्या है?
यह मामला भोगांव थाना क्षेत्र के निवासी मोहम्मद बहारुद्दीन से जुड़ा है, जिनके खिलाफ 2011 में बिजली चोरी का आरोप लगा था। 30 जुलाई 2011 को बिजली विभाग ने उनके कनेक्शन को ₹35,660 के बकाया बिल के कारण काट दिया था। जांच में पाया गया कि वे बिना भुगतान किए अवैध रूप से बिजली का उपयोग कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और केस कोर्ट पहुंचा।
हालांकि, मुकदमा लंबित रहने के दौरान ही बहारुद्दीन की मृत्यु हो गई। पुलिस द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किए जाने के बाद अदालत ने आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को यह अधिकार है कि वह बकाया बिल की राशि मृतक के वारिसों से वसूल करे।
फैसले का महत्व
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यह निर्णय बिजली चोरी जैसे मामलों में दीवानी दायित्व (Civil Liability) को स्पष्ट करता है।
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अदालत ने माना कि बकाया बिजली बिल एक ऋण की तरह है, जिसे मृतक के उत्तराधिकारियों को चुकाना होगा।
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इससे पहले ऐसे मामलों में कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अब यह फैसला एक नजीर बन गया है।
इस फैसले से स्पष्ट होता है कि आपराधिक मामले में मृत्यु के बाद आरोप तो खत्म हो जाते हैं, लेकिन वित्तीय दायित्व समाप्त नहीं होता। बिजली विभाग या अन्य संस्थाएं ऐसे मामलों में मृतक के वारिसों से बकाया राशि वसूल सकती हैं। यह निर्णय भविष्य में ऐसे विवादों के समाधान में मार्गदर्शक साबित होगा।

