मालेगांव ब्लास्ट के गवाह का खुलासा, योगी आदित्यनाथ का नाम लेने के लिए एटीएस ने बनाया था दबाव
Sandesh Wahak Digital Desk: साल 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले के गवाह मिलिंद जोशीराव ने एक बड़ा खुलासा किया है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र एटीएस (एंटी-टेररिज्म स्क्वाड) के अधिकारी उन पर लगातार दबाव बना रहे थे कि वह इस मामले में योगी आदित्यनाथ का नाम लें, ताकि उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।
एटीएस ने इन नामों को लेने का बनाया था दबाव
जोशीराव ने बताया कि एटीएस अधिकारी उनसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कुछ प्रमुख नेताओं का नाम लेने के लिए कह रहे थे, जिसमें योगी आदित्यनाथ, इंद्रेश कुमार, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, असीमानंद और प्रोफेसर देवधर जैसे नाम शामिल थे। जोशीराव के मुताबिक, उन्हें यह वादा किया गया था कि अगर वह इन सभी का नाम ले लेते हैं, तो उन्हें इस मामले से बरी कर दिया जाएगा।
जोशीराव ने आरोप लगाया कि उन्हें सात दिनों तक एटीएस की हिरासत में रखा गया था, जहां उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका कहना है कि डीसीपी श्रीराव और एसीपी परमबीर सिंह ने उन्हें धमकाया और डराया ताकि वह एटीएस के मन मुताबिक बयान दे सकें। उन्होंने यह भी दावा किया कि एटीएस ने उनके बयान में जो बातें लिखी हैं, उनमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है और यह सब एटीएस ने अपनी तरफ से जोड़ा था।

‘रायगढ़ मीटिंग’ को लेकर भी इनकार
एटीएस ने दावा किया था कि एक रायगढ़ मीटिंग में हिंदुत्ववादी राष्ट्र बनाने की शपथ ली गई थी। इस पर जोशीराव ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी मीटिंग की कोई जानकारी नहीं है।
17 साल बाद सभी आरोपी बरी
गौरतलब है कि 17 साल के लंबे इंतजार के बाद बीते गुरुवार (31 जुलाई) को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने सबूतों की कमी के चलते मालेगांव ब्लास्ट मामले के सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एटीएस और एनआईए की चार्जशीट में काफी अंतर है और अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि बम मोटरसाइकिल में था या इसे किसने लगाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि घटना के बाद घटनास्थल से फिंगरप्रिंट नहीं लिए गए और बाइक का चेसिस नंबर भी बरामद नहीं हुआ।
Also Read: मालेगांव ब्लास्ट के गवाह का खुलासा, योगी आदित्यनाथ का नाम लेने के लिए एटीएस ने बनाया था दबाव

