UP News: क्या अफसरशाही ने सरकार की फजीहत कराने का ले रखा है ठेका?
पहले मनमाने तरीके से स्कूलों का विलय फिर पंचायती राज के तुगलकी फरमान ने करायी किरकिरी
Sandesh Wahak Digital Desk: अफसरशाही अक्सर ऐसे आदेश जारी करती है, जिससे सरकार की फजीहत और विपक्ष को सियासत का खूब मौका मिलता है। पंचायती राज अफसरों का उदाहरण सामने है।

सीएम योगी की सख्ती के बाद जाति-धर्म से जुड़े लोगों के खिलाफ अवैध कब्जे के मामले में अभियान चलाने का तुगलकी फरमान देने वाला संयुक्त निदेशक तत्काल निलंबित हो गया। हालांकि पंचायती राज निदेशक को कार्रवाई से बचा लिया गया। जमीनी स्तर पर आंकलन किये बिना अफसरों द्वारा आदेश जारी करना नया नहीं है। कुछ ऐसा ही सरकारी स्कूलों के विलय के मामले में भी हो रहा है। दोनों ही मामलों में किरकिरी के बाद सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

स्कूलों के विलय के आदेश को रद्द करना शुरू
डेढ़ माह पहले बेसिक शिक्षा विभाग संभाले जिम्मेदार अफसरों ने स्कूलों के विलय का आदेश मनमाने तरीके से जारी किया। जो बाद में किरकिरी का सबब बन गया। सडक़ से संसद तक बढ़ते विरोध के बाद सीएम योगी की सख्ती पर अफसरों ने धड़ाधड़ कई जिलों में तमाम स्कूलों के विलय के आदेश को रद्द करना शुरू कर दिया है। लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाकर स्कूलों के विलय को अमलीजामा पहनाने वाले एक भी अफसर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी है। बाराबंकी में करीब तीन दर्जन सरकारी स्कूलों का विलय दम तोड़ चुका है।

ढाई हजार स्कूलों का विलय निरस्त होने की उम्मीद
ललितपुर में दर्जन भर स्कूलों के विलय का आदेश बदला गया है। एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी वाले करीब ढाई हजार स्कूलों का विलय निरस्त होने की उम्मीद है। गहरायी से जांच में संख्या आगे भी बढ़ सकती है। शासन से लेकर विभागीय मंत्री तक को आभास है कि विलय में किस कदर मनमानी की गयी है। इसके जिम्मेदार अफसर कौन हैं, जिनके कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है बल्कि विपक्ष के सीधे निशाने पर यूपी सरकार भी आ चुकी है।

सीएम का गोरखपुर भी अछूता नहीं है। जहां 30 स्कूलों का विलय खत्म हुआ है। हर जिले में करीब दो दर्जन स्कूलों का विलय निरस्त होने की उम्मीद है। अम्बेडकरनगर में आंकड़ा डेढ़ सौ के पार है। विलय में मनमानी की जांच तो भारी दबाव में शुरू हुई, लेकिन अफसरों पर कार्रवाई के मामले में शासन से लेकर मंत्री तक सिर्फ चुप्पी साधे हैं।
आदेश में दूरी-छात्र संख्या का सीधा उल्लेख क्यों नहीं?
शासन ने 16 जून को स्कूलों के विलय के आदेश दिए थे। इसमें कहा गया था कि जहां छात्र संख्या कम है, उन स्कूलों का विलय दूसरे नजदीकी स्कूल के साथ किया जाएगा। इस आदेश में दूरी और छात्र संख्या का सीधा उल्लेख नहीं था। इसी आदेश के मद्देनजर जिलों में प्रक्रिया शुरू हो गई। जिसमें काफी शिकायतें आने लगीं। अभिभावकों, ग्राम पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों ने लिखित शिकायतें भी कीं। इनमें कहा गया कि स्कूलों के विलय के बाद बच्चों को बहुत दूर पढऩे जाना होगा। वहीं छात्र संख्या का कोई मानक न होने की शिकायतें आईं। सियासी विरोध के साथ बच्चों ने कोर्ट का रुख भी करना शुरू कर दिया था।
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