Bareilly News: नियमों को ताक पर रखकर जारी हुआ कीटनाशक की दुकान का लाइसेंस, कृषि विभाग पर उठे सवाल
घनी आबादी वाले इलाके में प्रदूषण और बीमारियों का खतरा, अफसरों पर संरक्षण देने का आरोप
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बरेली में कृषि रक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग के एक कर्मचारी ने रामगंगा नगर योजना में एक फ्लैट की तीसरी मंजिल पर कीटनाशक की दुकान चलाने का लाइसेंस जारी कर दिया। यह मामला सामने आने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे विभाग के अधिकारियों पर कर्मचारी को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं।
खबरों के मुताबिक, विभाग के एक सहायक लिपिक ने 26 फरवरी 2018 को रामगंगा नगर योजना के सेक्टर 5, ब्लॉक 4 में स्थित एक फ्लैट की तीसरी मंजिल को ही दुकान बताकर नियम के खिलाफ कीटनाशक का लाइसेंस दे दिया। हैरानी की बात यह है कि जिस इलाके में यह लाइसेंस जारी हुआ, वह घनी आबादी वाला आवासीय क्षेत्र है। यहाँ कीटनाशकों की दुर्गंध फैलने से लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
लाइसेंस जारी करते समय तत्कालीन जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने भी मौके का सत्यापन नहीं किया। बताया जा रहा है कि इस फर्जी लाइसेंस का इस्तेमाल सरकारी कीटनाशकों को खुले बाजार में बेचने और लाखों की कमाई करने के लिए किया जा रहा है।
खतरनाक लापरवाही, स्वास्थ्य पर खतरा
लाइसेंस में दुकान की जो जानकारी दी गई है, वह भी पूरी तरह से गलत है। इसमें दुकान की चौहद्दी के बारे में झूठी बातें लिखी गई हैं। नियमानुसार, हानिकारक कीटनाशकों को घनी आबादी वाले आवासीय इलाकों में स्टोर नहीं किया जा सकता। इससे आसपास के घरों में फूड पॉइजनिंग, सांस और आंखों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
हाल ही में, जिला कृषि रक्षा अधिकारी ऋतुषा तिवारी ने खुद मौके पर जाकर फ्लैट की तीसरी मंजिल का भौतिक सत्यापन किया था। लेकिन उसके बाद भी इस नियम विरुद्ध जारी लाइसेंस को रद्द नहीं किया गया, जिससे यह पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। यह लापरवाही न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।

