यूपी में नहीं थम रहा मनरेगा घोटाला, मुर्दों को भी होता है मजदूरी का भुगतान
सीबीआई जांच में प्रदेश के अधिकांश डीएम को बख्शने से बढ़ी हिम्मत, फर्जी हाजिरी और जॉबकार्ड के खेल ने पकड़ी रफ्तार
Sandesh Wahak Digital Desk: अरबों के मनरेगा घोटाले की जांच में सीबीआई ने छोटे खिलाडियों को पकड़ा और जिलों के अधिकांश डीएम समेत शासन में बैठे बड़े अफसरों को बख्श दिया। नतीजतन घोटालेबाज़ों का हौसला बढ़ा। एक दशक बीतने के बावजूद मनरेगा में फर्जीवाड़ों की रफ्तार कतई कम नहीं हुई।

देश के कुल फर्जी जॉबकार्डों में यूपी की हिस्सेदारी 40 फीसदी होना निगरानी तंत्र में बड़ी चूक
यूपी के कई जिलों में मुर्दों के नाम भी मनरेगा का जॉबकार्ड बनाकर मजदूरी हड़पने के मामले सुखिऱ्यों में छाए हैं। खुद केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि देश के कुल फर्जी जॉब कार्डों में यूपी की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। फर्जी हाजिरी के संगठित खेल की जड़ें बेहद गहरी हैं।
माह भर पहले मेरठ डीएम से शिकायत हुई कि सठला गांव में महिला मजदूर रचना और सुरेश की मौत होने के बावजूद अभी भी उन्हें मनरेगा की मजदूरी दी जा रही है।

ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले जुलाई में देवरिया के बैतालपुर विकासखंड के लखनचंद गांव में तमाम मरे हुए लोगों का फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी का बंदरबांट किया गया। इसी तरह संभल में मई के दौरान दर्जन भर मृत ग्रामीणों को जिन्दा दिखाकर उनसे मनरेगा में मजदूरी कराना दर्शाया गया।

फर्जी मस्टररोल के जरिए बढ़ाए जा रहे मानव दिवस
मनरेगा में पारदर्शिता और तकनीक के दावों के बीच फर्जी हाजिरी का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है। एक दिन पहले खुलासा हुआ कि बदायूं में वजीरगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत पसेर पनौता में ताराचंद से लालसिंह के खेत तक 2547, 2548, 2550, 2551 समेत कई मस्टररोल जारी करके 39 मजदूरों की फोटो से फोटो अपलोड फर्जी हाजिरी दिखाकर सरकारी पैसा हजम किया गया। दरअसल फर्जी मस्टररोल के जरिये मानव दिवस बढाए जा रहे हैं। इसी तरह जौनपुर में जुलाई में सिकरारा में एक ही फोटो से आधा दर्जन पंचायतों में फर्जी हाजिरी दिखाकर घोटाला किया गया। जौनपुर में ही विकास खंड सिरकोनी की पंचायत विशुनपुर मझवारा में 16 माह में करीब 43 लाख का फर्जी भुगतान अंजाम दिया गया। वहीं फतेहपुर में पिछले माह 55 लाख से ज्यादा के घोटाले पर दस अफसरों व कर्मियों पर केस भी दर्ज हुआ है।

महाराजगंज मनरेगा घोटाले की जांच के दौरान लोकायुक्त ने 27 अक्टूबर तक डीएम से दस्तावेज मांगे हैं। वहीं अमरोहा में क्रिकेटर मोहम्मद शमी के परिजनों को मनरेगा मजदूर दिखाने का मामला सुर्खियां बटोर ही चुका है। सीबीआई को यूपी में मनरेगा घोटाले की जांच गहराई से करना चाहिए क्योंकि असली श्रमिकों का हक हड़पा जा रहा है। निगरानी के प्रति जिम्मेदार अफसरों को भी जांच के दायरे में लाना बेहद जरूरी है।
33 जिलों की सैकड़ों पंचायतों में भुगतान का खेल, शासन ने मांगी जांच रिपोर्ट
2022-23 में जहां प्रदेश की 377 ग्राम पंचायतों में घोटाला सामने आया था। वहीं कानपुर समेत प्रदेश के 33 जिलों की 238 ग्राम पंचायतों में भी धांधली पकड़ी गई है। नियम विपरीत अधिक भुगतान किये जाने की जांच शासन के आदेश पर शुरू हुई है। अलीगढ़, अमेठी, बलिया, बस्ती, चंदौली, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फीरोजाबाद, गाजीपुर, एटा, हरदोई, गोरखपुर, जालौन, जौनपुर, कानपुर, कासगंज, कौशांबी, खीरी, ललितपुर, महाराजगंज, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत रविदासनगर, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, सुल्तानपुर एवं उन्नाव की जांच रिपोर्ट मांगी है।
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