नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बलात्कार नहीं: HC
Sandesh Wahak Digital Desk: इलाहाबाद हाई कोर्ट (HC) ने 2005 के एक विवादास्पद मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बलात्कार नहीं है, खासकर तब जब यह मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत विवाह किया गया हो। इस फैसले में अदालत ने आईपीसी की धाराओं 363, 366 और 376 के तहत एक व्यक्ति की सजा रद्द कर दी।
क्या है मामला ?
दरअसल इस मामले में एक व्यक्ति पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया। निचली अदालत ने उसे सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट (HC) ने इस निर्णय को पलटते हुए कहा कि आरोपी ने लड़की से विवाह किया था और यह कृत्य उस समय लागू कानून के तहत अपराध नहीं माना जाता था।
यहां जस्टिस अनिल कुमार ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए कहा, परिस्थितियों में यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश करने में विफल रहा है जिससे यह साबित हो कि अपीलकर्ता ने पीड़िता को बहकाया या जबरदस्ती ले गया।

पीड़िता की गवाही
दरअसल यहां कोर्ट (HC) ने ध्यान दिया कि पीड़िता ने भी गवाही में कहा कि उसने स्वेच्छा से अपीलकर्ता के साथ जाने का फैसला किया। उसने दावा किया कि वह आरोपी के साथ गई और उससे विवाह कर लिया, जिसके बाद वे एक महीने तक भोपाल में रहे। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह फैसला उस समय के कानून और परिस्थितियों पर आधारित है, जिसे बाद में बदल दिया गया है। अदालत का तर्क यह था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत यह कृत्य अपराध के दायरे में नहीं आता था।
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