Treasury Scam: कोषागारों की व्यवस्था तार-तार, अपने ही कर रहे करोड़ों पार

चित्रकूट व लखनऊ समेत कई जिलों में सामने आ चुका है घोटाला, मुर्दों को भी मिल रही पेंशन

Sandesh Wahak Digital Desk: यूपी में ट्रेजरी यानी सरकारी कोषागार की व्यवस्था फुलप्रूफ मानी जाती है। इसके बावजूद लगातार प्रदेश के कई जिलों के कोषागारों में जहां वर्षों से मुर्दों को पेंशन बांटकर सरकारी धन हजम किया जा रहा है।

वहीं कई बार फर्जी अभिलेखों के जरिये करोड़ों रूपए निकाल लिए जाने की घटनाएं भी सुर्खियों में छायी हैं। कोषागारों की व्यवस्था जिन रक्षक रूपी अफसरों-कर्मियों के हाथों में है। वही भ्रष्टाचार के खातिर पूरी तरह भक्षक की भूमिका में खड़े हैं। ताजा प्रमाण चित्रकूट का कोषागार घोटाला है। जहां सौ करोड़ से ऊपर की हेराफेरी का अंदेशा है। हालांकि 43 करोड़ से ज्यादा के घोटाले में 97 आरोपी नामजद हैं। मुख्य आरोपी कोषागार के एटीओ संदीप श्रीवास्तव की रहस्मयी मौत कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

इसके बावजूद अभी तक जांच किसी विशेषज्ञ एजेंसी को नहीं सौंपी गयी। हालांकि उक्त घोटाले की जांच दो स्तरों पर हो रही है। दो साल पहले सीएम योगी की नाक के नीचे लखनऊ के कोषागार में एक करोड़ 42 लाख के घोटाले को महिला लेखाकार रेणुका राय ने अंजाम दिया। गिरफ्तार आरोपी ने अपने परिजनों के खाते में धनराशि भेजी थी।

हरदोई में कई सालों में हड़पे गए करोड़ों रुपये

आरोपी लेखाकार सेवा से बर्खास्त क्यों नहीं हुई और लखनऊ कोषागार के बड़े अफसरों की क्या जवाबदेही थी, यह बताने को कोई तैयार नहीं है। हरदोई कोषागार में 2009 से 2016 के बीच पांच करोड़ 30 लाख हड़पे गये। जिस दिन आरोपी लेखाकार दीपांकर शुक्ला को रिटायर होना था। तब बर्खास्त किया गया।

दो कोषाधिकारी जेल भेजे गए। जनवरी में सहारनपुर में 365 मामले प्रकाश में आये, जहां फर्जी तरीके से कोषागार से पेंशन ली जा रही थी। दस्तावेज जांचने की $िफक्र किसी को नहीं थी। वहीं पांच साल पहले बदायूं के दातागंज कोषागार में पांच करोड़ 78 लाख का घोटाला किया गया। सीएम योगी के निर्देश पर पांच पीसीएस निलंबित भी हुए। मुख्य आरोपी कैशियर हरीश कुमार ही था। कोषागार में स्टाम्प नहीं जमा किये गए थे।

रकम के बंटवारे में झगड़े के बाद खुली घोटाले की पोल

तीन कोषाधिकारी भी निलंबित हुए। बाद में बहाली पा गए। पांच साल से घोटाला जारी था। किसी भी अफसर को कानोकान खबर नहीं लगी। चार साल पहले मुरादाबाद कोषागार से सात करोड़ का फर्जीवाड़ा फर्जी बिल बनाकर किया गया। रिटायर भूलेख लिपिक अनिल मेहरोत्रा मास्टरमाइंड था। रकम के बंटवारे में झगड़ा हुआ तो घोटाला खुलते देर नहीं लगी वरना ज्यादा रकम की बंदरबांट हो चुकी होती।

गोरखपुर में तीन साल पहले सरकारी कर्मियों की फर्जी आईडी से एक करोड़ 58 लाख कोषागार से हजम कर लिए गए। फर्जीवाड़े के लिए चकबंदी के लेखाकार और बस्ती के लेखपाल ने 45 खाते खोले थे। वहीं बरेली में 16 साल से मृत पिता की पेंशन कोषागार कर्मियों की साठगांठ से बेटा उठा रहा था। यूपी सरकार को बाकी जिलों के सरकारी कोषागारों की भी गहनता से जांच करानी चाहिए।

सात साल पूर्व मरे चार पेंशनरों के खातों में भेजे 13.20 करोड़

चित्रकूट के कोषागार घोटाले में जांच के दौरान साफ हुआ है कि सात साल पहले मर चुके चार पेंशनरों के खातों में 13.20 करोड़ भेजे गए थे। मृतक पेंशनरों की फाइलों को दोबारा सक्रिय किया गया था। इसके बाद परिजनों से मिलीभगत कर कोषागार कर्मियों ने रुपयों का बंदरबांट कर लिया। इन चार खातों की फाइलों को विशेष ऑडिट टीम की जांच के दौरान कोषागार कर्मियों ने छिपा लिया था। कोषागार के वरिष्ठ अफसरों की लापरवाही उजागर हुई है।

Also Read: बरेली में अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 40 कब्जेदार को 7 दिन का अंतिम अल्टीमेटम

Get real time updates directly on you device, subscribe now.