प्रशांत किशोर का बिहार और पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में मिला नाम, विरोधी दलों ने साधा निशाना
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (पीके) एक बड़े विवाद में फंस गए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि उनका नाम बिहार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में भी दर्ज है, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 का उल्लंघन है।
प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में कोलकाता पश्चिम लोकसभा क्षेत्र की भवानीपुर विधानसभा (जहां ममता बनर्जी का निर्वाचन क्षेत्र है) से मतदाता हैं। वहाँ उनका एपिक नंबर आईयूआई0686683 दर्ज है। वहीं, बिहार में वह अपने पैतृक गाँव रोहतास जिले के अंतर्गत करगहर विधानसभा क्षेत्र के कोनार मध्य विद्यालय में मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं।
कानूनी पचड़े में फंसे प्रशांत किशोर
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा 17 और धारा 18 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक से अधिक वोटर आईडी नहीं रख सकता है। एक से अधिक चुनाव क्षेत्रों में मतदाता आईडी रखना गैरकानूनी है और ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है।
यह विवाद इसलिए भी बड़ा है क्योंकि प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं और अब बिहार में अपनी जन सुराज पार्टी के साथ विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
विरोधी दलों ने घेरा
दो वोटर आईडी होने की खबर सामने आते ही विरोधी दलों के नेताओं ने प्रशांत किशोर पर जमकर निशाना साधा है।
अमित मालवीय (भाजपा आईटी सेल प्रमुख): उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, आमतौर पर अगर उनकी पार्टी की बिहार में कोई वास्तविक उपस्थिति होती, तो यह एक बड़ा विवाद होता। लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि जन सुराज का कोई महत्व नहीं है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि राहुल गांधी के सभी सहयोगी ‘वोट चोरी’ में शामिल हैं।
चिराग पासवान (केंद्रीय मंत्री): लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, उन्होंने दो-दो वोटर आईडी बना रखे हैं, यह गलत है। जानकारी होते हुए भी सुधार नहीं किया गया, यह और भी गलत है।
अभय दुबे (कांग्रेस प्रवक्ता): उन्होंने कहा कि उन्हें अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें न तो प्रशांत किशोर पर भरोसा है और न ही चुनाव आयोग पर भरोसा है।
फिलहाल, प्रशांत किशोर को इस मामले में फॉर्म 8 भरकर अपना पता बदलने या एपिक नंबर का प्रतिस्थापन करने का मौका है, लेकिन विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गया है।
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