एसआईआर: किसकी जमीन मजबूत करेगा और किसकी खिसकाएगा?

चुनाव से पहले गर्माए उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारे

Sandesh Wahak Digital Desk : देश की सियासत में उत्तर प्रदेश का अहम रोल है यहां राजनीति हमेशा गरम रहती है। फिर चाहे छोटा से कस्बा हो या महानगर, सियासी पारा चढ़ा ही रहता है। मुद्दे तो जैसे हवाओं में घूमते हैं। अब वोटर लिस्ट के विशेष सघन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को ही ले लें…आयोग ने जैसे ही मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू की, राजनैतिक हलकों में पारा चढ़ गया और बन गया मुद्दा। मजे की बात यह कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी 2027 में होना है और इसकी तारीख भी अभी तय नहीं है। इसके बावजूद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एसआईआर को लेकर होहल्ला मचाने लगे। एसआईआर के जरिये निर्वाचन आयोग जहां मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की बात कर रहा है, वहीं विपक्ष ने एसआईआर की प्रक्रिया पर ही सवाल उठाने शुरू कर दिये हैं।

विपक्ष ने बनाया मुद्दा, कहा- लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश

बताते चलें कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा जनसंख्या लगभग 24.63 करोड़ है। इस साल 5 जनवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में वोटरों की संख्या लगभग 15 करोड़ बताई गई है। इस वोटर लिस्ट रिवीजन में 21 लाख नये मतदाता जोड़े गए हैं। उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा के चुनावों में साल भर से ऊपर को समय हो, लेकिन आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होते ही सियासी गलियारों में गर्मी बढ़ गई। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एसआईआर को लेकर सडक़ों पर उतर आई है।

जहां सपा का आरोप है कि वोटर लिस्ट बनाने में लगे अधिकारियों की पोस्टिंग जाति और धर्म देख कर ही की जा रही है। इससे पूरे सिस्टम की निष्पक्षता ही सवालों के घेरे में आ गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनकी सांसद पत्नी डिंपल यादव ने एसआईआर कराने के पीछे सरकार की मंशा साफ नहीं है। यह पूरी तरह से लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश है। उधर, कांग्रेस भी एसआईआर के विरोध में मुखर हो उठी है। राहुल गांधी का कहना है कि एसआईआर के जरिये सरकार लोगों के मताधिकार का हनन कर रही है। एसआईआर के विरोध के नाम पर दोनों पार्टियां सडक़ों पर उतर आई हैं।

एसआईआर के पक्ष में आईं भाजपा, बसपा और अपना दल (एस)

इसके जवाब में डिप्टी सीएम का कहना है कि कांग्रेस-सपा का इंडिया गठबंधन फेक मतदाता सूची के आधार पर चुनाव प्रभावित करने के प्रयासों में लिप्त हैं। निर्वाचन आयोग ऐसे फेक मतदाताओं को एसआईआर के जरिये चिह्नित कर बाहर कर रहा है। वहीं बसपा और अपना दल ने एसआईआर प्रक्रिया को निर्वाचन आयाग का एक अच्छा कदम बताया है। बसपा सुप्रीमो मायावती का कहना है कि इस प्रक्रिया से जो वोट कटे या छूट गए हैं, वे फिर से बन सकेंगे।

इसके लिए लोगों को पर्याप्त समय भी मिल गया है। अपना दल (एस )की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल का कहना है कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे मतदाता सूची में संशोधन का पूरा अधिकार है। मतदाता सूची में तमाम फर्जी नाम शामिल हैं, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव के लिए इन्हें हटाया जाना बेहद जरूरी है। कुल मिलाकर प्रदेश में चुनावी बिगुल अभी बजा भी नहीं है लेकिन राजनीतिक जंग छिड़ गई है। अब ये तो भविष्य तय करेगा कि एसआईआर अभियान आने वाले समय में किसकी जमीन मजबूत करेगा और किसकी खिसकाएगा।

क्या है विशेष सघन पुनरीक्षण

विशेष सघन पुनरीक्षण यानी एसआईआर वर्ष भर चलने वाली मतदाता सूची के संक्षिप्त पुनरीक्षण से आगे की प्रक्रिया है। इसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर गणना फॉर्म भरेंगे। खास बात यह कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं से तीन बार संपर्क किया जाएगा। यदि कोई मतदाता अस्थाई रूप से बाहर है या फिर कार्यालय समय पर उपलब्ध नहीं है तो व ऑनलाइन अपना विवरण स्वयं अपडेट कर सकता है। निर्वाचन अधिकारी 27 अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची के अनुसार प्रत्येक मतदाता के लिए यूनिक एन्यूमरेशन फॉर्म तैयार करेंगे। बीएलओ इन फॉर्मों को प्रत्येक मतदाता तक पहुंचाएंगे और 2002 से 2004 के बीच हुए पिछले एसआईआर के रिकॉर्ड से मिलान करने में मदद करेंगे। पारदर्शिता के लिए इस बार पुनरीक्षण में आधार कार्ड भी लगेगा। इससे डुप्लीकेट मतदाता, सूची से बाहर हो जाएंगे।

रिपोर्ट: राजकृष्ण पांडेय

 

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