बलरामपुर आत्मदाह कांड: आरोपी दरोगा पवन कनौजिया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, अब कोर्ट में चलेगा मुकदमा
Sandesh Wahak Digital Desk: बलरामपुर जिले गैड़ास बुजुर्ग थाने के सामने दलित युवक राम बुझारत के आत्मदाह कांड में आरोपी तत्कालीन थानाध्यक्ष पवन कुमार कनौजिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। शासन से अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बाद दरोगा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। अब यह मामला कोर्ट में पहुंचेगा, जहां पवन कनौजिया पर मुकदमे की प्रक्रिया शुरू होगी।
शासन से अभियोजन स्वीकृति के बाद एएसपी गोंडा ने दाखिल की चार्जशीट
इस केस की विवेचना एएसपी गोंडा राधेश्याम राय के नेतृत्व में की गई है। जांच में दरोगा के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर चार्जशीट दाखिल की गई। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के उस निर्देश के बाद हुई, जिसमें राम बुझारत की पत्नी कुसुमा देवी की याचिका पर सरकार को जांच और अभियोजन प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा गया था। शासन ने इस मामले में राम बुझारत की मौत के दो साल के बाद हाई कोर्ट द्वारा 24 अक्टूबर को मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गयी थी।
विभागीय बचाव और विवाद
सूत्रों के मुताबिक, अब आरोपी दरोगा पर विभागीय कार्रवाई की संभावना भी बढ़ गई है। हालांकि, फिलहाल उस पर वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण बताया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दरोगा को पहले प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई थी, लेकिन बाद में डीआईजी देवीपाटन रेंज ने यह प्रविष्टि समाप्त कर दी। फिलहाल पवन कनौजिया की पोस्टिंग आईजी ऑफिस देवीपाटन में है, जहां वह पीआरओ के अतिमहत्वपूर्ण व जिम्मेदार पद पर तैनात है।
क्या था मामला
24 अक्टूबर 2023 को विजयदशमी के दिन निर्माणाधीन गैड़ास बुजुर्ग थाने के सामने दलित युवक राम बुझारत ने आत्मदाह कर लिया था। आरोप था कि पुलिस और अन्य लोगों ने उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया था। गंभीर रूप से झुलसे राम बुझारत को लखनऊ रेफर किया गया, जहां 30 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।
जिले के तत्कालीन डीएम अरविंद सिंह की मजिस्ट्रेटी जांच में दरोगा पवन कनौजिया को दोषी पाया गया। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी की जांच में भी यह साबित हुआ कि दारोगा ने विवादित भूमि पर अवैध कब्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही इस मामले गांव के चार-पांच लोग व राजस्व दो कर्मियों को भी आरोपी बनाया गया था, जो जेल भी गए थे। फिलहाल ये लोग बेल पर बाहर है।
मृतक की पत्नी बोलीं- “अब मिलेगा न्याय”
चार्जशीट दाखिल होने के बाद दलित संगठनों ने इस कदम को न्याय की दिशा में अहम बताया। राम बुझारत की पत्नी कुसुमा देवी ने कहा, “हमने दो साल से ज्यादा समय तक न्याय के लिए संघर्ष किया है। अब उम्मीद है कि मेरे पति की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी।”
पहले बचाने की हुई थी कोशिश
घटना के बाद पुलिस विभाग ने दारोगा को बचाने की कोशिशें भी की थीं। तत्कालीन सीओ उतरौला की रिपोर्ट में मृतक की पत्नी को ही दोषी ठहराया गया था, लेकिन डीएम जांच में यह रिपोर्ट गलत निकली। इसके बाद शासन ने सीओ और थानाध्यक्ष, दोनों का तबादला कर दिया और हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी से जांच करवाई गयी थी।
दारोगा पवन कनौजिया को निलंबित किया गया, लेकिन कुछ महीनों बाद प्रतिकूल प्रविष्टि देकर बहाल कर दिया गया। अब चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही उसके खिलाफ न्यायिक कार्रवाई शुरू हो रही है। खैर, अब देखना होगा कि मृतक रामबुझारत की पत्नी कुशमा देवी व उनके बच्चों को अंतिम न्याय कब मिलता है। फिलहाल, हाईकोर्ट बेंच लखनऊ के इस आदेश के बाद रामबुझारत की पत्नी और परिवार के सदस्य संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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