मक्का-मदीना हादसे में ज़िंदा बचा एकमात्र शोएब, जानें कैसे बची जान

Sandesh Wahak Digital Desk: मक्का-मदीना (Mecca-Medina) राजमार्ग पर सोमवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उमरा के बाद मदीना लौट रहे 45 भारतीय तीर्थयात्रियों की बस अचानक एक तेल टैंकर से टकरा गई, जिसके बाद आग की लपटों ने पलभर में पूरी बस को अपने कब्जे में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में 42 भारतीयों समेत 45 लोगों की मौत हो गई। केवल एक नाम, 24 वर्षीय मोहम्मद अब्दुल शोएब इस भयावह रात में मौत के मुंह से निकलकर वापस लौटा।

नींद नहीं आई, और बच गई जान

दरअसल हैदराबाद के नटराजनगर कॉलोनी निवासी मोहम्मद अब्दुल शोएब उस रात बस में सो नहीं पा रहे थे, जबकि बाकी सभी यात्री गहरी नींद में थे। बेचैनी में वह ड्राइवर के बगल वाली सीट पर जाकर बैठ गए और समय काटने के लिए उससे बातें करते रहे। शायद यह जाग ही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा बन गई।

हादसे के चंद सेकंड पहले तक बात कर रहे शोएब और ड्राइवर ने किसी तरह बस से छलांग लगा दी। उसी समय तेज रफ्तार से आ रहे तेल टैंकर से बस की टक्कर हुई और देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। अंदर सो रहे 42 भारतीय यात्री धुआं और आग से निकल ही नहीं पाए।

फोन पर टूटा दुःख का पहाड़

जिसके बाद सुबह करीब 5.30 बजे शोएब ने अपने रिश्तेदार मोहम्मद तहसीन को फोन कर सिर्फ इतना बताया कि वह किसी तरह बच निकला है, लेकिन बाकी लोग आग में फंस गए। थोड़ी देर बाद खबर आई कि शोएब को उपचार के लिए मदीना के एक जर्मन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके बाद से परिवार उससे सीधे संपर्क नहीं कर पा सका है।

दरअसल शोएब इस यात्रा पर अपने माता-पिता अब्दुल कादिर (56), गौसिया बेगम (46), दादा मोहम्मद मौलाना और चाचा के परिवार के तीन अन्य सदस्यों के साथ गए थे। सभी लोग मक्का में उमरा की रस्में पूरी कर मदीना की ओर जा रहे थे। लेकिन इस त्रासदी में शोएब के परिवार के कोई भी सदस्य नहीं बच सके।

उनके रिश्तेदार तहसीन ने बताया कि इलाके के चार और लोग मक्का में ही रुक गए थे। हादसे के तुरंत बाद शोएब ने उनमें से एक को फोन कर घटना की जानकारी दी। बस से कूदने के दौरान आई चोटों के कारण वह फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन है।

हज हाउस में इंतजार

जिसके बाद हैदराबाद स्थित हज हाउस में मृतकों के परिजन सुबह से ही किसी सूचना की आस में बैठे रहे। हर किसी की आंखों में एक ही सवाल- क्या उनके प्रियजन बच पाए हैं? लेकिन जवाब केवल एक- बस में सवार सभी भारतीयों में से सिर्फ शोएब जीवित है। बाकी कोई भी मौत की लपटों से बाहर नहीं निकल पाया।

दरअसल मक्का-मदीना के बीच उमरा के बाद लौट रहे तीर्थयात्रियों की यह यात्रा कभी मदीना तक नहीं पहुंच सकी। एक हादसे ने 42 घरों के चिराग बुझा दिए और एक युवा को जिंदगी भर का दर्द दे गया। यह त्रासदी सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों का अनकहा दर्द है जिनके अपने अब कभी वापस नहीं लौटेंगे।

 

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