प्रशांत किशोर ने 24 घंटे का मौन तोड़ा, अपनी 90% संपत्ति जन सुराज को किया समर्पित
Sandesh Wahak Digital Desk: 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने की ज़िम्मेदारी लेते हुए, पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर (पीके) ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करने वाली जगह भितिहरवा आश्रम में 24 घंटे का मौन उपवास रखकर आत्ममंथन किया।
शुक्रवार मौन व्रत तोड़ने के बाद, पीके ने जन सुराज पार्टी के भविष्य के लिए दो बड़े ऐलान किए, जिसमें एक नए आंदोलन की शुरुआत और उनकी निजी संपत्ति का समर्पण शामिल है।
15 जनवरी से बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान
मौन व्रत तोड़ने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए प्रशांत किशोर ने महात्मा गांधी की प्रेरणा से फिर से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की। 15 जनवरी से बिहार के सभी 1 लाख 18 हजार वार्ड में जाएंगे और ‘बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान’ के तहत लोगों से संवाद करेंगे। उनका उद्देश्य है कि वे सरकार द्वारा चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा कराएँगे। विद्यालय की छात्राओं ने जूस और पानी पिलाकर उनका मौन और उपवास खत्म कराया।
पीके ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए अपनी संपत्ति को लेकर एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनकी कुल कमाई का 90% हिस्सा जन सुराज को समर्पित होगा। पिछले 20 वर्षों में अर्जित संपत्ति में से परिवार के घर को छोड़कर बाकी सब जन सुराज को दान करेंगे। उन्होंने समर्थकों से भी अपील की कि हर जनसुराजी साल में एक हजार रुपया संगठन को दे, ताकि इस राजनीतिक आंदोलन को मजबूत आधार मिल सके।
परिवार के लिए एक घर छोड़कर अपनी सारी चल अचल संपत्ति जनसुराज अभियान के लिए डोनेट करता हूँ। साथ हीं आपसे भी गुजारिश है कि कम से कम 1 हजार इस अभियान के लिए डोनेट करें ये अभियान रुकने वाला नहीं है इस अभियान को कोई कुचल नहीं सकता है।
— प्रशांत किशोर pic.twitter.com/CzITSPntUs— Let us change bihar (@SulabhJha4) November 21, 2025
सरकार पर बोला सीधा हमला
प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया। उन्होंने कहा, सरकार ने चुनाव से ठीक पहले गरीब वोटरों को 10,000 रुपये देकर वोट खरीदा और 2 लाख रुपये देने का लोकलुभावन वादा कर जनता को भ्रमित किया। बिहार चुनाव में इस बार पैसे से वोट खरीदने का खुला खेल देखने को मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, उन्हें अब ईमानदार मुख्यमंत्री समझना मुश्किल हो गया है, क्योंकि सरकार में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को मंत्री बनाया गया है।
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