झूठे मुकदमे करने वालों को तुरंत मिले सजा, रवि किशन ने लोकसभा में उठाई सख्त कानून बनाने की मांग

Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय जनता पार्टी के सांसद और अभिनेता रवि किशन ने देश में झूठे मुकदमे दर्ज करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग की है। लोकसभा में शून्यकाल (जीरो आवर) के दौरान उन्होंने यह मुद्दा उठाया और फर्जी मामलों के कारण निर्दोष लोगों को होने वाली मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों पर प्रकाश डाला।

रवि किशन ने मांग की कि कानून बनाकर न केवल झूठा केस दायर करने वाले पर, बल्कि उन जाँच अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जो फर्जी आरोपों को जाँच में सही ठहराते हैं। उन्होंने कहा, अगर मुजरिम है, गलत किया है तो सजा मिले। लेकिन अगर कोई जुर्म नहीं किया है और किसी ने उस पर झूठा मुकदमा किया है, तो जिस पर मुकदमा होता है, उसका परिवार बिखर जाता है, समाज में साख खत्म हो जाती है, बहन-बेटी की शादी बर्बाद हो जाती है। और मुकदमा करने वाला आराम से रहता है।

सांसद ने यह भी जोड़ा कि अनगिनत झूठे मुकदमों का आर्थिक बोझ सरकार पर भी पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कानून का दुरुपयोग कर फर्जी मुकदमा दायर करने वालों के लिए सजा तय होनी चाहिए। रवि किशन की मांग की गंभीरता को समझने के लिए, यह जानना जरूरी है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 248 बरी हुए निर्दोष आरोपी को झूठे आरोप लगाने वाले पर मुकदमा करने का अधिकार देती है, जिसमें 5 से 10 साल तक की सजा हो सकती है।

हालांकि, मशहूर वकील अश्विनी दुबे ने इस संबंध में ‘संदेश वाहक न्यूज़’ से बात करते हुए कहा कि धारा 248 का प्रावधान एक नए केस की शुरुआत है, जो एक लंबी न्यायिक प्रक्रिया है। कई सालों से कोर्ट-कचहरी करने के बाद बरी हुआ निर्दोष आरोपी झूठे केस का नया मुकदमा करके फिर अगले कई साल अदालतों के चक्कर नहीं काटना चाहता। इस मनोवैज्ञानिक स्थिति का फायदा झूठे केस करने वाले उठाते हैं।

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