डकैती हमेशा अंधेरे में ही होती है, इसलिए नहीं आती थी बिजली: CM योगी
Sandesh Wahak DIgital Desk: उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं और इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Aditya Nath) ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। राज्य की बिजली व्यवस्था को लेकर उन्होंने 2017 से पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में यूपी में बिजली नहीं थी, क्योंकि उस समय की सरकारें अंधेरे में रहना चाहती थीं। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि डकैती हमेशा अंधेरे में ही होती है, इसलिए पहले बिजली व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर रखा गया।
SIR अभियान पर सख्त टिप्पणी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान को लेकर भी विपक्ष पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह दावा किया जा रहा है कि SIR का काम 98 फीसदी पूरा हो गया है, जबकि यह सच्चाई नहीं है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक बूथ पर करीब 200 से 250 घर होते हैं और SIR को ठीक से कराना कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों ने कुछ जगहों पर बांग्लादेशियों के नाम से वोटर दर्ज करा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि कहीं बेटे की उम्र 20 साल, पिता की 30 साल और दादा की 40 साल लिखी गई है, जो साफ तौर पर फर्जीवाड़ा दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे फर्जी नामों पर आपत्ति दर्ज करानी होगी और जो नाम छूट गए हैं, उन्हें वोटर लिस्ट में शामिल कराना जरूरी है।
बाहरी पतों पर बने मतदाता
सीएम योगी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है, जिसके हिसाब से 64 फीसदी मतदाता होने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल करीब 12 करोड़ मतदाता हैं और लगभग 4 करोड़ मतदाता अभी भी कम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये मिसिंग मतदाता ज्यादातर बीजेपी के समर्थक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव बूथ स्तर पर लड़ा जाता है और उदाहरण देते हुए बताया कि संभल में असम के पते से वोटर बने हुए पाए गए हैं, जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
पंकज चौधरी का कार्यकर्ताओं को भरोसा
इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बने पंकज चौधरी ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी में न तो परिवारवाद चलता है और न ही जातिवाद, बल्कि साधारण कार्यकर्ता भी बड़े पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि 1991 में 26 साल की उम्र में उन्हें महराजगंज से लोकसभा का टिकट मिला और तब से वे सात बार सांसद रह चुके हैं। पंकज चौधरी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी उनके लिए अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है।
कार्यकर्ता के साथ खड़ा होना ही नेतृत्व
पंकज चौधरी ने कहा कि पार्टी में सबसे महत्वपूर्ण कार्यकर्ता होते हैं और वे हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे, उनकी बात सुनेंगे और उनके लिए लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए नेतृत्व का मतलब सबकी बात सुनना, सबकी समस्याओं को दूर करना और सभी को साथ लेकर चलना है। उन्होंने यह भी कहा कि पद पर बैठने वाला व्यक्ति भूतपूर्व हो सकता है, लेकिन कार्यकर्ता कभी भूतपूर्व नहीं होता।
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