मनरेगा का नाम बदलने पर छिड़ा सियासी संग्राम, खड़गे बोले- यह योजना का नाम बदलना नहीं, गरीबों के अधिकारों की हत्या है
Sandesh Wahak Digital Desk: केंद्र सरकार द्वारा दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ (MGNREGA) का नाम बदलकर विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) करने के फैसले पर संसद में भारी हंगामा शुरू हो गया है। गुरुवार को विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में इकट्ठा होकर इस फैसले का कड़ा विरोध किया और इसे गरीबों और पिछड़ों के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह मामला केवल महात्मा गांधी का नाम हटाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए प्रावधानों के जरिए सरकार काम के अधिकार को खत्म करने की साजिश रच रही है।
खड़गे ने कहा, सरकार अब अपनी मर्जी से काम देगी और डिमांड नहीं है कहकर काम देने से मना कर सकती है। यह पिछड़े, दलितों और गरीबों के सुरक्षा कवच पर हमला है। कांग्रेस इस अधिकार को बचाने के लिए हर राज्य और जिले में लड़ाई लड़ेगी।
Congress Parliamentary party Chairperson Mrs Sonia Gandhi ji, Congress President & LoP, Rajya Sabha, Mr Mallikarjun @kharge ji along with #INDIA bloc MPs, protest the renaming and restructuring of #MahatmaGandhi #NREGA #MGNREGA pic.twitter.com/33AiQ5j2BV
— Supriya Bhardwaj (@Supriya23bh) December 18, 2025
महात्मा गांधी का अपमान
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस कदम को महात्मा गांधी के अपमान से जोड़ते हुए कहा, महात्मा गांधी के आखिरी शब्द ‘हे राम’ थे, लेकिन सरकार गांधी और राम के बीच बेवजह का फर्क पैदा कर रही है। जिस योजना ने करोड़ों लोगों को सुरक्षा दी, उसे खत्म क्यों किया जा रहा है? 125 दिनों की गारंटी की बात तो कही गई है, लेकिन कानून को बारीकी से पढ़ें तो इसमें कोई गारंटी बची ही नहीं है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इसे सरकार की हीन भावना का परिणाम बताया और कहा कि यह सीधे तौर पर बापू के नाम का अनादर है।
क्या है नया विवाद
सरकार ने मनरेगा के ढांचे में बदलाव के लिए नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत योजना का नाम महात्मा गांधी के नाम से बदलकर विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) करने का प्रस्ताव है। विपक्ष का दावा है कि नए नियमों के तहत काम मांगने पर भी सरकार इसे ‘मांग की कमी’ बताकर टाल सकती है, जिससे इस योजना का कानूनी अनिवार्य चरित्र (Legal Entitlement) खत्म हो जाएगा।
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