लखनऊ में प्रदूषण पर सियासी कोहरा, मैच रद्द होने पर अखिलेश का तंज, सरकार बोली- विपक्ष फैला रहा भ्रम

Lucknow News: नवाबों के शहर लखनऊ में मौसम का मिजाज क्या बदला, सियासत का तापमान सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दरअसल, कल घने कोहरे और खराब विजिबिलिटी के कारण भारत-दक्षिण अफ्रीका टी-20 मैच रद्द करना पड़ा। बस यहीं से शुरू हुआ आंकड़ों और आरोपों का दौर। सपा मुखिया अखिलेश यादव जहां इसे दिल्ली जैसा प्रदूषण बता रहे हैं, वहीं योगी सरकार के मंत्रियों का कहना है कि विपक्ष केवल डर का माहौल बना रहा है।

मैच रद्द होने के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए कि दिल्ली का प्रदूषण अब लखनऊ पहुंच गया है। सपा विधायक रविदास मल्होत्रा ने तंज कसते हुए कहा, सरकार की फाइलों में सब कुछ ठीक है, लेकिन हकीकत में जनता का दम घुट रहा है। सरकार के सब दावे किताबी हैं। सपा ने मांग की है कि कल से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में इस पर विशेष चर्चा की जाए।

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ओमप्रकाश राजभर का पलटवार

सपा के आरोपों पर कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा, प्रदूषण लखनऊ में नहीं, दिल्ली में है। विपक्ष को हर बात में राजनीति दिखती है। अगर लखनऊ की हवा वाकई खराब है, तो अखिलेश यादव मास्क लगाकर क्यों नहीं घूम रहे? हम अपनी सरकारी एजेंसी की बात मानेंगे, किसी विदेशी ऐप की नहीं।

सरकार ने साफ किया है कि लखनऊ का AQI फिलहाल 174 है, जो ‘मॉडरेट’ यानी मध्यम श्रेणी में आता है। सरकार ने प्राइवेट ऐप्स के आंकड़ों को भ्रामक बताते हुए तकनीकी कारण गिनाए हैं।

मानकों का फर्क: विदेशी ऐप्स US-EPA मानकों का उपयोग करते हैं, जबकि भारत में NAQI का पालन होता है। दोनों के पैमानों में जमीन-आसमान का अंतर है।

सेंसर की शुद्धता: सरकारी स्टेशन (लालबाग, तालकटोरा, अलीगंज) प्रमाणित उपकरणों का उपयोग करते हैं, जबकि निजी ऐप्स अक्सर अनकैलिब्रेटेड सेंसर या सैटेलाइट डेटा पर निर्भर होते हैं।

धूल और धुएं का अंतर: भारतीय शहरों में धूल ज्यादा होती है। विदेशी मॉडल धूल को भी खतरनाक धुआं मान लेते हैं, जिससे AQI अचानक ज्यादा दिखने लगता है।

24 घंटे का औसत: सरकारी आंकड़ा पिछले 24 घंटों का वैज्ञानिक औसत होता है, जबकि ऐप्स किसी एक चौराहे पर लगे जाम या धूल को पूरे शहर का हाल बता देते हैं।

घबराने की जरूरत नहीं: प्रशासन

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी निजी ऐप के आंकड़ों से न डरें। शहर की वायु गुणवत्ता नियंत्रण में है। सरकार का कहना है कि निजी ऐप्स द्वारा फैलाया जा रहा डर तथ्यहीन है और लोगों को केवल CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के आंकड़ों पर ही भरोसा करना चाहिए।

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