Lucknow News: अभ्युदय कोचिंग भर्ती घोटाला, 69 में से 48 कोआर्डिनेटर निकले फर्जी, आउटसोर्सिंग कंपनी पर FIR
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में गरीब और मेधावी छात्रों को IAS, PCS, NEET और JEE जैसी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराने वाली मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हुआ है। योजना के तहत कोर्स कोआर्डिनेटरों की भर्ती में भारी धांधली पाई गई है। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण के कड़े रुख के बाद आउटसोर्सिंग कंपनी ‘अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ लखनऊ के गोमती नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ ही, कंपनी को ब्लैकलिस्ट (काली सूची) करने के आदेश भी दिए गए हैं।
नियमों के मुताबिक, अभ्युदय कोचिंग में कोर्स कोआर्डिनेटर के पद पर केवल वही व्यक्ति नियुक्त हो सकता है जिसने कम से कम PCS की मुख्य परीक्षा (Mains) पास की हो। लेकिन जांच में सामने आया कि नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य लोगों को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर बैठा दिया गया। बताया जा रहा है कि कुल 69 पदों में से मात्र 21 लोग ही अपनी योग्यता साबित कर पाए। जबकि बाकी 48 लोगों ने फर्जी मार्कशीट और कूटरचित प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल की थी।
शिकायत के बाद खुली पोल
भ्रष्टाचार का यह मामला तब सामने आया जब 29 अक्टूबर को मंत्री असीम अरुण को इस धांधली की शिकायत मिली। उन्होंने तुरंत पूरे प्रदेश में तैनात कोआर्डिनेटरों के दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए। जब बारीकी से वेरिफिकेशन हुआ, तो पता चला कि आधे से ज्यादा लोग अपात्र हैं।
फिलहाल पुलिस ने आउटसोर्सिंग कंपनी पर शिकंजा कसा है, लेकिन विभाग अब उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है जिनकी जिम्मेदारी दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) करने की थी। लापरवाही बरतने वाले सरकारी कर्मचारी भी जल्द ही कार्रवाई की जद में आएंगे।
23,800 छात्रों का भविष्य दांव पर
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के हर जिले में अभ्युदय कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जहाँ लगभग 23,800 छात्र अपने भविष्य को संवारने में जुटे हैं। 16 फरवरी 2021 से शुरू हुई इस योजना ने कई बच्चों को कामयाबी के शिखर तक पहुँचाया है, लेकिन इस घोटाले ने विभाग की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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