GST के ‘डिजिटल लुटेरों’ पर STF का शिकंजा, 100 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी करने वाला गिरोह गिरफ्तार

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने शुक्रवार को एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बोगस फर्मों और फर्जी ई-वे बिल के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की राजस्व क्षति पहुंचा रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी (GST) चोरी की है।

कैसे हुआ इस ‘महाघोटाले’ का खुलासा?

इस पूरे खेल की शुरुआत तब हुई जब उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में जीएसटी विभाग को कुछ ऐसी फर्मों के बारे में जानकारी मिली, जो कागजों पर तो चल रही थीं, लेकिन जमीन पर उनका कोई अस्तित्व नहीं था। ये ‘बोगस फर्में’ केवल फर्जी बिल काटने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फायदा उठाने के लिए बनाई गई थीं।

गाजियाबाद के कवि नगर थाने में ‘महेश एंटरप्राइजेस’ नाम की एक फर्म के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ मुख्यालय को विवेचना में तकनीकी सहयोग के लिए लगाया गया। एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक प्रमेश कुमार शुक्ल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने दिल्ली-एनसीआर में अपना जाल बिछाया।

गिरफ्तारी और अभियुक्तों का ब्योरा

एसटीएफ ने तकनीकी इनपुट और मुखबिरों की सूचना पर नोएडा स्थित अपने फील्ड इकाई कार्यालय में पूछताछ के बाद गिरोह के 4 मुख्य सदस्यों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपी इस प्रकार हैं।

  • हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस: (39 वर्ष) निवासी टैगोर गार्डन, नई दिल्ली। यह इस गिरोह का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
  • जितेन्द्र झा: (26 वर्ष) निवासी समस्तीपुर, बिहार (हाल पता: कुतुब विहार, नई दिल्ली)।
  • पुनीत अग्रवाल: (26 वर्ष) निवासी पश्चिम विहार, नई दिल्ली।
  • शिवम: (25 वर्ष) निवासी विजय एन्क्लेव, नई दिल्ली।

इनके पास से 2 लैपटॉप, 9 मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और करीब 55 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं।

काम करने का तरीका: कागजों पर कारोबार, जेब में मुनाफा

एसटीएफ की पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, वह चौंकाने वाली हैं। गिरोह का सरगना हरदीप सिंह दिल्ली में अकाउंटेंसी का काम करता था। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक ऐसा ‘सिस्टम’ बनाया था, जिसमें सामान का लेनदेन केवल कागजों पर होता था।

  1. बोगस फर्मों का पंजीकरण: ये लोग गरीब या अनजान लोगों के आधार कार्ड और दस्तावेजों का उपयोग कर दिल्ली, यूपी और हरियाणा जैसे राज्यों में फर्जी फर्में रजिस्टर्ड कराते थे।
  2. फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल: बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के, ये फर्में सेल्स इनवॉइस काटती थीं। जीएसटी पोर्टल पर फर्जी ई-वे बिल अपलोड किए जाते थे ताकि ऐसा लगे कि माल वास्तव में ट्रक से भेजा गया है।
  3. इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) बेचना: असली फर्में, जिन्हें टैक्स बचाना होता था, वे हरदीप से संपर्क करती थीं। हरदीप अपनी बोगस फर्मों के जरिए उन्हें फर्जी बिल बेचता था, जिससे वे कंपनियां सरकार से भारी टैक्स छूट (ITC) क्लेम कर लेती थीं।
  4. सर्कुलर ट्रेडिंग: बैंक ट्रांजेक्शन को असली दिखाने के लिए ये लोग एक बोगस फर्म से दूसरी और दूसरी से तीसरी फर्म में पैसा घुमाते थे। अंत में यह पैसा नकद (Cash) के रूप में वापस निकाल लिया जाता था।

तकनीकी शातिरपना: 30 ईमेल आईडी और दर्जनों ओटीपी

आरोपियों के मोबाइल की जांच में पता चला कि वे 30 से अधिक ईमेल आईडी एक साथ ऑपरेट कर रहे थे। इन आईडी का इस्तेमाल फर्जी फर्मों के रजिस्ट्रेशन, जीएसटी रिटर्न फाइलिंग और बैंक ओटीपी प्राप्त करने के लिए किया जाता था। गिरोह के पास कई वास्तविक फर्मों के लॉगिन आईडी और पासवर्ड भी थे, जिससे वे आसानी से करोड़ों का हेरफेर कर रहे थे।

100 करोड़ का आंकड़ा तो सिर्फ शुरुआत है!

एसटीएफ के अनुसार, शुरुआती जांच में ‘महेश एंटरप्राइजेस’ और अन्य संबंधित फर्मों के माध्यम से करीब 100 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की पुष्टि हुई है। हालांकि, जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, यह आंकड़ा कई गुना बढ़ने की संभावना है। अकेले वास्तविक फर्मों को बेचे गए इनपुट टैक्स क्रेडिट से ही 30 करोड़ से अधिक की सीधी राजस्व क्षति का अनुमान लगाया गया है।

आगे की कार्रवाई

गिरफ्तार आरोपियों को गाजियाबाद पुलिस की मदद से कोर्ट में पेश किया जा रहा है। एसटीएफ अब उन ‘वास्तविक फर्मों’ की लिस्ट तैयार कर रही है, जिन्होंने इन जालसाजों से फर्जी बिल खरीदे थे। जल्द ही उन कंपनियों के मालिकों पर भी गाज गिर सकती है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि राजस्व की चोरी करने वाले किसी भी संगठित गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। एसटीएफ की इस कार्रवाई से दिल्ली-एनसीआर के ‘बिलिंग माफियाओं’ में हड़कंप मच गया है।

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