लालू परिवार में अपनों की जंग, रोहिणी आचार्य बोलीं- अहंकार सिर चढ़ा तो अपनों ने ही विरासत को तहस-नहस कर दिया
Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रीय जनता दल के भीतर चल रही सियासी उठापटक के बीच रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर तीखा हमला बोला है। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट के जरिए उन्होंने इशारों-इशारों में परिवार के ही कुछ सदस्यों और उनके करीबियों पर गंभीर आरोप लगाए। रोहिणी का मानना है कि लालू यादव ने जिस विरासत को खून-पसीने से सींचा, उसे बाहरी लोग नहीं बल्कि ‘घर के ही कुछ षड्यंत्रकारी’ मिटाने पर तुले हैं।
रोहिणी ने अपनी पोस्ट में बहुत ही कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने लिखा, बड़ी शिद्दत से खड़ी की गई विरासत को खत्म करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, अपने ही काफी होते हैं। हैरानी तो तब होती है जब लोग उसी वजूद और पहचान को मिटाने पर आमादा हो जाते हैं, जिससे उन्हें नाम मिला। उन्होंने आगे लिखा कि जब इंसान के विवेक पर पर्दा पड़ जाता है और अहंकार सिर पर चढ़ जाता है, तब कुछ विनाशक लोग ही उसकी बुद्धि हर लेते हैं।
बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी "बड़ी विरासत" को तहस – नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, "अपने" और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं ..
हैरानी तो तब होती है , जब "जिसकी" वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के…
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) January 10, 2026
चप्पल फेंकने और जलील करने का आरोप
यह पहली बार नहीं है जब रोहिणी का गुस्सा फूटा है। बिहार चुनाव में आरजेडी की हार के बाद उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबियों पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए थे। रोहिणी ने दावा किया था कि पार्टी के भीतर उन्हें न केवल गंदी गालियां दी गईं, बल्कि उनके ऊपर चप्पल तक फेंककर मारी गई।
उस वक्त उन्होंने भावुक होते हुए कहा था, एक बेटी और मां को जलील किया गया। सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने सच का साथ दिया और अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। रोहिणी ने आरोप लगाया कि उन्हें मजबूरन अपने रोते हुए माता-पिता को छोड़ना पड़ा और उनसे उनका मायका तक छीन लिया गया। उन्होंने खुद को ‘अनाथ’ बताते हुए यहाँ तक कह दिया कि भगवान करे किसी घर में रोहिणी जैसी बेटी पैदा न हो जिसे अपनों से ही ऐसी बेइज्जती झेलनी पड़े।
रोहिणी आचार्य के इन बयानों ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह लड़ाई सिर्फ भाई-बहन की नहीं, बल्कि आरजेडी की कमान और लालू यादव की राजनीतिक विरासत पर कब्जे की है। फिलहाल इस मामले पर तेजस्वी यादव या परिवार के अन्य सदस्यों की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है।
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