बिहार लौटे तेजस्वी ने नीतीश सरकार को दिया 100 दिन का अल्टीमेटम, बोले- चुनाव में लोक हारा और तंत्र जीता
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद लंबे समय तक गायब रहने वाले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव रविवार को वापस लौट आए हैं। उनके पटना कदम रखते ही विरोधियों के उन सवालों पर विराम लग गया है, जो उनकी गैरमौजूदगी पर उठाए जा रहे थे। हालांकि, तेजस्वी के लिए यह वापसी चुनौतियों से भरी है एक तरफ पार्टी का गिरता मनोबल और दूसरी तरफ बिखरता महागठबंधन।
हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी ने चुनाव परिणामों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, पिछले साल चुनाव में लोकतंत्र की हार हुई है। वहां ‘लोक’ (जनता) हार गई और ‘तंत्र’ (मशीनरी) जीत गया। सत्तापक्ष ने जनतंत्र को धन तंत्र और मशीन तंत्र में बदल दिया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार षड्यंत्र और छल-कपट के सहारे बनी है।
100 दिन की चुप्पी और बड़े वादों का हिसाब
तेजस्वी ने सरकार को तुरंत घेरने के बजाय एक रणनीतिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा, हम सरकार के शुरुआती 100 दिनों के फैसलों और नीतियों पर फिलहाल कुछ नहीं बोलेंगे। हम देखना चाहते हैं कि बिहार की माताओं और बहनों को क्या मिलता है। तेजस्वी ने सरकार को याद दिलाया कि उन्होंने 1 करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने घोषणापत्र को धरातल पर उतारे।
"लोक हारा है, तंत्र जीता है
लोकतंत्र को धनतंत्र बना दिया हैहम सकारात्मक राजनीति करते है, हम सौ दिन तक नहीं बोलेंगे।
सौ दिन के बाद देखते है, महिलाओं को 2 लाख मिले की नहीं।
हर जिले में 4-5 कारखाने खुलते है की नहीं"
~तेजस्वी जी
100 दिन का मोहलत है, सरकार घोषणापत्र लागू करे,… pic.twitter.com/wECIgf30em
— Priyanka Bharti (@priyanka2bharti) January 11, 2026
तेजस्वी के सामने अपनों और सपनों की चुनौती
भले ही तेजस्वी आक्रामक दिख रहे हों, लेकिन उनके लिए राह आसान नहीं है। विधानसभा चुनाव में आरजेडी महज 25 सीटों पर सिमट गई है। नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी भी बाल-बाल बची है। बिहार में कांग्रेस अब ‘एकला चलो’ की राह पर है, जिससे महागठबंधन कमजोर पड़ा है। पार्टी के साथ-साथ परिवार के भीतर चल रही खींचतान भी तेजस्वी के लिए बड़ी सिरदर्दी बनी हुई है।

