गुजारा भत्ता वसूली के लिए नहीं होगी पति की गिरफ्तारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Sandesh Wahak Digital Desk: पति-पत्नी विवाद और गुजारा भत्ते की वसूली के मामलों में गिरफ्तारी के डर से जूझ रहे लोगों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) से राहत भरा फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि पत्नी को गुजारा भत्ता न दे पाने की स्थिति में पति के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध है और यह अधिकार क्षेत्र का अतिलंघन भी है। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना है।

गुजारा भत्ते की वसूली के लिए गिरफ्तारी नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने कहा कि बिना विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया अपनाए किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनी नहीं जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ते की वसूली केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है और इसके लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करना न्यायसंगत नहीं है। परिवार न्यायालय को इस प्रकार का अधिकार नहीं है कि वह भत्ते की वसूली के लिए पति की गिरफ्तारी का आदेश दे।

न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल ने कहा कि गुजारा भत्ता दंड प्रक्रिया संहिता, सिविल प्रक्रिया संहिता और परिवार अदालत अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही वसूला जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी कानून में गुजारा भत्ते की वसूली के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है।

मेंटेनेंस न देना अपराध नहीं

दरअसल कोर्ट (High Court) ने यह भी साफ किया कि जिस व्यक्ति पर गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी है, उसे अपराधी की तरह नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस के आदेशों को लागू कराने में न्यायालयों को इतना अधिक उत्साह नहीं दिखाना चाहिए कि किसी व्यक्ति की गरिमा और स्वतंत्रता को कुचल दिया जाए, भले ही यह सामने आए कि जानबूझकर भत्ता नहीं दिया गया हो।

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश की परिवार अदालतों द्वारा जिस तरह से नियमित रूप से गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा रहे हैं, वह न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि अमानवीय भी है। किसी व्यक्ति को अपराधी की तरह गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करना उसकी गरिमा के खिलाफ है और एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में उसके अधिकारों का हनन करता है।

गिरफ्तारी वारंट को किया गया रद्द

दरअसल यह फैसला मोहम्मद शाहजाद और शाजिया खान के बीच गुजारा भत्ता वसूली की कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने परिवार अदालत अलीगढ़ को निर्देश दिया कि वह भत्ता वसूली के लिए कानून में उपलब्ध उपायों का ही सहारा ले। कोर्ट ने कहा कि वेतन कुर्की जैसे उपाय या सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत वसूली की कार्यवाही की जा सकती है, लेकिन गिरफ्तारी कर वसूली नहीं की जा सकती।

इस दौरान कोर्ट ने अपर परिवार अदालत अलीगढ़ द्वारा 25 सितंबर 2025 को जारी पति के गिरफ्तारी वारंट को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया। परिवार अदालत ने धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत पत्नी को दस हजार रुपये और बच्चे को पांच हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। आदेश का पालन न होने पर धारा 128 के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने गैरकानूनी माना।

गुजारा भत्ता देना दायित्व है अपराध नहीं

यहां इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने अंत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्नी को गुजारा भत्ता देना पति का विधिक दायित्व है, लेकिन इसका पालन न करना कोई आपराधिक कृत्य नहीं है, जिसके लिए गिरफ्तारी की जाए। कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता वसूली के नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया जा सकता और कानून की मर्यादा के भीतर रहकर ही कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

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