अमेरिका ने अरब सागर में मार गिराया ईरानी ड्रोन, ईरान ने बदला बातचीत का ठिकाना और एजेंडा

Sandesh Wahak Digital Desk: मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में बारूद की गंध के बीच कूटनीतिक चालें तेज हो गई हैं। ईरान ने अमेरिका के साथ होने वाली इस हफ्ते की बातचीत को लेकर सख्त तेवर अपनाए हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह तुर्किए के बजाय ओमान में बातचीत करना चाहता है। साथ ही, उसने शर्त रखी है कि चर्चा केवल न्यूक्लियर मुद्दों तक ही सीमित रहे, किसी और विषय पर नहीं।

ईरान का इस्तांबुल (तुर्किए) में होने वाली बैठक से पैर पीछे खींचना और एजेंडा बदलना हैरान करने वाला है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका द्वारा मिडल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने से ईरान चिढ़ा हुआ है। ईरान चाहता है कि बातचीत का दायरा छोटा रहे और वह केवल परमाणु समझौते पर केंद्रित रहे, जबकि अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा और ड्रोन हमलों जैसे मुद्दों को भी घसीटना चाहता है।

तनाव की असली वजह मंगलवार को अरब सागर में हुई एक घटना है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन अरब सागर से गुजर रहा था। तभी एक ईरानी ड्रोन आक्रामक तरीके से जहाज की ओर बढ़ने लगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, चेतावनी के बावजूद जब ड्रोन नहीं रुका, तो एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने वाले एक F-35C फाइटर जेट ने उसे हवा में ही ढेर कर दिया। अमेरिका ने साफ किया कि उसके किसी भी सैनिक या साजो-सामान को नुकसान नहीं पहुँचा है।

ईरान का दावा, हमने फुटेज भेज दी थी

वहीं दूसरी ओर, ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने अलग कहानी पेश की है। ईरानी सूत्रों का कहना है कि उनका ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में केवल निगरानी मिशन पर था। ईरान ने यह भी दावा किया कि संपर्क टूटने (मार गिराए जाने) से पहले ड्रोन ने निगरानी की सारी फुटेज अपने कमांड सेंटर को सुरक्षित भेज दी थी। ईरान अभी इस बात की जांच कर रहा है कि ड्रोन का संपर्क आखिर टूटा कैसे।

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