‘चोटी खींचना महापाप है, इसका हिसाब ऊपर होगा’, शंकराचार्य विवाद पर ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान
Sandesh Wahak Digital Desk: संगम नगरी में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक ब्राह्मणों के साथ हुई कथित बदसलूकी ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले में अब तक की सबसे तीखी टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इसे ‘अक्षम्य अपराध’ करार दिया है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने क्या कहा?
एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “ब्राह्मणों और बटुकों की चोटी खींचना महापाप है। जिन लोगों ने भी चोटी को हाथ लगाया है, उन्हें इसका फल भोगना पड़ेगा। यह पाप कई वर्षों तक पीछा नहीं छोड़ेगा। सब कुछ ऊपर वाले के ‘खाता बही’ में दर्ज हो रहा है।” उन्होंने इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की वकालत की है।
विवाद की जड़: क्या हुआ था मौनी अमावस्या पर?
यह पूरा विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के शाही स्नान के दिन शुरू हुआ। जब शंकराचार्य अपने रथ और लगभग 200 अनुयायियों के साथ संगम की ओर बढ़ रहे थे। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ का हवाला देकर उनके रथ को आगे बढ़ने से रोक दिया। आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों और शंकराचार्य के बटुक ब्राह्मणों के बीच धक्का-मुक्की हुई। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बटुकों की चोटी खींची और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने उन पुलिसकर्मियों की तस्वीरें भी सार्वजनिक कीं। यह पूरा वाकया प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल की मौजूदगी में होने का दावा किया गया है।
प्रशासन की सफाई: सुरक्षा या सख्ती?
हालांकि प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल और पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। प्रशासन का कहना है कि सुबह के समय कोहरा बहुत घना था और संगम पर लाखों की भीड़ थी। ऐसे में रथ के साथ प्रवेश करना ‘भगदड़’ का कारण बन सकता था। शंकराचार्य से पालकी छोड़कर पैदल जाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उनके अनुयायियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और जबरदस्ती घुसने की कोशिश की।
नोटिस और पलटवार: “कोई तय नहीं करेगा कि मैं कौन हूँ”
मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य को नोटिस जारी कर पूछा कि उन्हें भविष्य के मेलों में प्रतिबंधित क्यों न किया जाए? इसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “न प्रशासन, न मुख्यमंत्री और न ही देश का राष्ट्रपति यह तय करेगा कि कौन शंकराचार्य है।” उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई होने तक स्नान न करने की जिद पकड़ ली और अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ (राक्षस) का जिक्र किया, जिस पर शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि एक सीएम को शिक्षा और स्वास्थ्य पर बात करनी चाहिए, न कि धर्म-अधर्म और कालनेमि पर। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नरम रुख अपनाते हुए स्वामी जी से स्नान करने और विवाद खत्म करने की अपील की।
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