साइबर ठगों के तीन हथियार ‘लालच, लापरवाही और डर’, यूपी के DGP ने सिखाए सुरक्षा के मंत्र
Sandesh Wahak Digital Desk: आज डिजिटल क्रांति के दौर में जहां मोबाइल और इंटरनेट हमारी जरूरत बन गए हैं, वहीं साइबर अपराधी भी उतने ही सक्रिय हो गए हैं। इटावा में आयोजित एक जागरूकता कार्यशाला में यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि साइबर अपराधों से बचने का एकमात्र रास्ता ‘सतर्कता’ है।
तीन रास्तों से शिकार बनाते हैं ठग: लालच, लापरवाही और डर
डीजीपी ने बताया कि लगभग 60% साइबर अपराध वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े होते हैं, जिसके पीछे तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं। कोई भी वैध बैंक या संस्था कम समय में पैसा दोगुना करने का वादा नहीं करती। ऊंचे रिटर्न के झांसे में न आएं और केवल RBI या SEBI अधिकृत संस्थानों में ही निवेश करें। अनजान लिंक, लुभावने मैसेज या मोबाइल पर आने वाली संदिग्ध फाइल (.apk) को क्लिक न करें। यह आपके फोन को हैक कर बैंक खाता खाली कर सकता है।
इन दिनों ठग खुद को पुलिस, CBI या ED का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगते हैं। डीजीपी ने साफ किया कि भारत में कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर न तो जुर्माना मांगती है और न ही ऑनलाइन गिरफ्तारी करती है।
सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग का खतरा
युवाओं को आगाह करते हुए डीजीपी ने हाल ही में गाजियाबाद में हुई एक दुखद घटना का जिक्र किया, जहाँ तीन बहनों ने ‘कोरियन ड्रामा’ की लत के चलते आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग में हमेशा गेम बनाने वाला ही जीतता है, खेलने वाला नहीं। अभिभावकों को बच्चों की इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।
ठगी होने पर क्या करें? डायल करें ‘1930’
डीजीपी ने बताया कि अगर आप किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना समय गंवाए 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। ठगी के तुरंत बाद दी गई सूचना से बैंक खातों को फ्रीज करना आसान होता है और आपके पैसे वापस मिलने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है। साइबर अपराध रोकने और ठगे गए पैसे को फ्रीज (Lien) कराने में उत्तर प्रदेश आज देश में तीसरे स्थान पर है।
यूपी पुलिस की तैयारी: हर जिले में साइबर थाना
प्रदेश की तैयारियों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि 2014 में जहां यूपी में सिर्फ एक साइबर थाना था, आज 75 के 75 जिलों में साइबर थाने खुल चुके हैं। प्रदेश के सभी 1581 थानों में ‘साइबर हेल्पडेस्क’ बनाई गई है और 26,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है।
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