ये हैं Cardiotoxicity से बचने के आयुर्वेदिक उपाय

Sandesh Wahak Digital Desk: हार्ट हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में हार्ट से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। हार्ट अटैक, हार्ट फेल और कार्डियक अरेस्ट जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिल रही हैं। हार्ट की मांसपेशियों और नसों को नुकसान पहुंचने का एक कारण कैंसर का इलाज भी हो सकता है। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के दौरान कुछ मरीजों के हार्ट पर प्रतिकूल असर पड़ता है, जिसे मेडिकल भाषा में कार्डियोटॉक्सिसिटी (Cardiotoxicity) कहा जाता है।

क्या है Cardiotoxicity?

दरअसल जब कोई कैंसर मरीज कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से इलाज कराता है तो कुछ मामलों में हार्ट की मांसपेशियों या नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे हार्ट कमजोर हो सकता है और ब्लड पंप करने में दिक्कत आ सकती है। कुछ स्थितियों में यह मायोकार्डिटिस यानी सूजन और हार्ट फेल का कारण भी बन सकती है। जिसे Cardiotoxicity कहते हैं और इस समस्या के इलाज के लिए कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह ली जाती है तथा आवश्यक दवाएं दी जाती हैं।

आयुर्वेद में संभावित विकल्प

वहीं पतंजलि की रिसर्च में दावा किया गया है कि उनकी दवा CardioGrit Gold हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती है और Cardiotoxicity के गंभीर प्रभावों को कम करने में सहायक हो सकती है। कंपनी के अनुसार यह दवा अर्जुन, मोती पिष्टी, अकीक पिष्टी और जहरमोहरा पिष्टी से तैयार की गई है। रिसर्च में बताया गया है कि यह दवा हार्ट की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही यह कार्डियक सेल्स की सुरक्षा करने और हार्ट को होने वाले नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इस तरह की रिसर्च अभी शुरुआती स्तर की है और इसे क्लिनिकल उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता है।

एलोपैथिक दवाओं केसेवन में सावधानी

दरअसल किसी भी आयुर्वेदिक या हर्बल सप्लीमेंट को एलोपैथिक इलाज के साथ लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। CardioGrit Gold या किसी भी अन्य आयुर्वेदिक दवा को शुरू करने से पहले अपने इलाज कर रहे डॉक्टर को इसकी जानकारी देना आवश्यक है। भले ही आयुर्वेदिक दवाओं को सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अन्य दवाओं के साथ इनके सेवन में सावधानी जरूरी है।

कार्डियोटॉक्सिसिटी के लक्षण

दरअसल Cardiotoxicity की स्थिति में जल्दी थकान महसूस होना, लगातार सांस फूलना, दिल की धड़कन का बढ़ना या कम होना, छाती में दर्द और पैरों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ना या घटना भी संकेत हो सकता है। ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

वहीं हार्ट को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच कराना जरूरी है। रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना, तनाव कम रखना और पर्याप्त नींद लेना फायदेमंद है। तंबाकू और शराब से दूरी बनाए रखना और संतुलित आहार लेना भी हार्ट की सेहत के लिए आवश्यक कदम हैं।

 

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