कैबिनेट से दूरी, प्रयागराज में धरने पर बैठे संजय निषाद, आखिर क्या है पूरी मांग?
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। संजय निषाद, जो योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, गोरखपुर में भावुक होकर रोने के एक दिन बाद ही अब धरने पर बैठ गए हैं। सोमवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में शामिल होने के बजाय वह प्रयागराज के श्रृंग्वेरपुर धाम पहुंच गए और जीटी रोड (प्रयागराज-लखनऊ मार्ग) पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
क्या है विवाद? मस्जिद निर्माण और कब्जे का आरोप
धरने की मुख्य वजह श्रृंग्वेरपुर धाम में कथित अवैध कब्जा और मस्जिद निर्माण है। संजय निषाद का आरोप है कि भगवान श्रीराम और निषादराज की ऐतिहासिक मिलन स्थली पर अवैध निर्माण हो रहा है। मजार का विस्तार किया जा रहा है। इससे धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व प्रभावित हो रहा है।
300 मीटर क्षेत्र में निर्माण पर सवाल
मंत्री ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा कि पुरातत्व नियमों के अनुसार 300 मीटर के दायरे में निर्माण प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अतिक्रमण किया जा रहा है। तत्काल प्रभाव से कब्जा हटाने की मांग की गई है।
सड़क जाम, पुलिस तैनात
धरने के कारण प्रयागराज-लखनऊ मार्ग पर लंबा जाम लग गया। जिसके बाद भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कड़ी धूप में मंत्री समर्थकों के साथ डटे रहे। करीब ढाई घंटे बाद पुष्कर वर्मा के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ, जिसमें उन्होंने मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने की बात कही।
कैबिनेट बैठक से बनाई दूरी
जब योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ में कैबिनेट बैठक चल रही थी।
ओपी राजभर
आशीष पटेल
अनिल कुमार
जैसे सहयोगी दलों के मंत्री मौजूद थे, लेकिन संजय निषाद अनुपस्थित रहे।
जयंती से पहले चेतावनी
मंत्री ने प्रशासन को चेताया है कि 23 मार्च 2026 को महाराजा गुह्यराज निषाद जयंती है।इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। यदि कब्जा नहीं हटाया गया, तो आस्था को ठेस और अव्यवस्था हो सकती है।
पहले भी जताई थी नाराजगी
गौरतलब है कि एक दिन पहले गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में संजय निषाद फूट-फूटकर रो पड़े थे और अपने समाज के उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिससे राजनीतिक हलकों में पहले से ही हलचल थी।
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