नदियों की अनदेखी बन रही संकट का कारण, झिंगहा नदी का अस्तित्व खतरे में- संजीव सिंह राठौर
बहराइच। “कुछ शहर नदियों के लिए तरसते हैं, और जहाँ नदियाँ मौजूद होती हैं, वहाँ लोग उनकी अहमियत भूल जाते हैं।” इसी गंभीर चिंता को व्यक्त करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता संजीव सिंह राठौर ने झिंगहा नदी (सरयू शाखा), बहराइच की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताई है।
उन्होंने कहा कि झिंगहा नदी आज अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। कभी शहर की पहचान और जीवन का आधार रही यह नदी आज अतिक्रमण, प्रदूषण और उपेक्षा के कारण संकट में है।
राठौर ने बताया कि नदी के किनारों पर बढ़ते अतिक्रमण और गंदगी के कारण इसका प्राकृतिक स्वरूप तेजी से नष्ट हो रहा है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह नदी पूरी तरह समाप्त हो सकती है।
उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि झिंगहा नदी का संरक्षण केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि बहराइच की सांस्कृतिक विरासत को बचाने का भी प्रश्न है।
अंत में उन्होंने कहा कि “यदि आज हम अपनी नदियों को नहीं बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।” उन्होंने स्थानीय प्रशासन से मांग की कि झिंगहा नदी को अतिक्रमण मुक्त कर उसके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए तत्काल प्रभाव से एक ठोस कार्ययोजना बनाई जाए !
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