देश के 40 लाख चिकित्सा मित्रों के लिए उठी मांग, प्रशिक्षण के बाद मिले प्राथमिक उपचार की अनुमति

UP News: ग्रामीण भारत में लोगों को प्राथमिक उपचार देने वाले चिकित्सा मित्रों का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा। ऑल इंडिया बेसिक हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (जेपीसी) ने इसे व्यापक जनचर्चा का विषय बनाने का फैसला किया है। नई दिल्ली के आंध्र भवन में हुई संगठन की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में राज्यसभा सदस्य बीडा मस्तान राव और लोकसभा सदस्य डगुमल्ला प्रसाद राव ने संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की।

30 से 40 लाख लोगों के लिए प्रशिक्षण की मांग

बैठक की जानकारी देते हुए जेपीसी के वाइस चेयरमैन और इंडियन रूरल मेडिकोज सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. ओपी मिश्रा ने बताया कि चिकित्सा मित्रों से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा मित्र खासकर ग्रामीण इलाकों में लोगों को प्राथमिक उपचार देते हैं। इसलिए उनकी भूमिका और उनसे जुड़े सवालों पर व्यापक चर्चा जरूरी है।

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, देशभर में करीब 30 से 40 लाख लोग अनुभव के आधार पर चिकित्सा संबंधी काम कर रहे हैं, लेकिन उनके पास मान्य चिकित्सकीय डिग्री नहीं है। बैठक में मांग की गई कि ऐसे लोगों को तय समयसीमा के भीतर व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाए। निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार देने की अनुमति देने की व्यवस्था भी बनाई जाए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और चिकित्सा मित्रों की भूमिका पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संगठन के अनुसार, जेपीसी का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मार्च में स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर इस मुद्दे पर ज्ञापन भी सौंप चुका है।

देश के 40 लाख चिकित्सा मित्रों के लिए उठी मांग, प्रशिक्षण के बाद मिले प्राथमिक उपचार की अनुमति

13 राज्यों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

बैठक की अध्यक्षता तेलुगू देशम पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और जेपीसी अध्यक्ष टीडी जनार्दन ने की। अध्यक्ष डॉ. केजी गोविंदा रेड्डी और डॉ. एनएल राहुल ने मुख्य भाषण दिया।

बैठक में उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और कर्नाटक के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि चिकित्सा मित्रों के मुद्दे को व्यापक जनचर्चा का हिस्सा बनाया जाएगा और उनकी मांगें संबंधित सरकारी मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाई जाएंगी। संगठन का कहना है कि अनुभव के आधार पर चिकित्सा कार्य करने वालों के लिए प्रशिक्षण और नियमन की व्यवस्थित व्यवस्था बनाने से ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार से जुड़े मुद्दों पर नीतिगत चर्चा आगे बढ़ सकती है।

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