UP MLC चुनाव को लेकर सपा निर्वाचन आयोग पहुंची, CM योगी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
UP MLC Election 2026: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) की 11 शिक्षक और स्नातक खंड सीटों पर चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने मुख्यमंत्री के दौरों और कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी कराने, फुटेज की जांच करने और उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस जारी करने की मांग की है।
सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों और घोषणाओं से शिक्षक और स्नातक मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है।
CM योगी के कार्यक्रमों पर उठाए सवाल
सपा ने अपनी शिकायत में 12 अक्टूबर 2026 को गोरखपुर में मुख्यमंत्री के करीब 12 हजार शिक्षकों के साथ संवाद का जिक्र किया है। इसके अलावा पार्टी ने 13 अक्टूबर को 68 हजार ग्राम प्रहरियों का मानदेय बढ़ाने और चौकीदारों की भर्ती की घोषणा पर भी सवाल उठाए हैं।
सपा का आरोप है कि चुनाव की घोषणा के बाद लखनऊ में प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, प्रवक्ताओं और अध्यापकों को नियुक्ति पत्र देना भी मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग के आचार संहिता संबंधी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान शिक्षक और स्नातक मतदाताओं को प्रभावित करने वाले कार्यक्रमों और घोषणाओं पर रोक होनी चाहिए।
दोनों डिप्टी सीएम को नजरबंद करने की मांग
सपा ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) और ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) पर भी आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि दोनों नेता इलाहाबाद, झांसी और लखनऊ निर्वाचन क्षेत्रों में डेरा डालकर जिलाधिकारियों और अन्य अधिकारियों पर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में काम करने का दबाव बना रहे हैं।
पार्टी ने दोनों उप मुख्यमंत्रियों को उनके आवास पर नजरबंद करने और चुनाव प्रचार से रोकने की मांग की है। साथ ही मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची चस्पा करने की बात कही, ताकि केवल वैध मतदाता ही मतदान कर सकें।
सपा ने सर्किट हाउस और डाक बंगलों में अधिकारियों को बुलाकर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में अनुचित दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। इसके अलावा, विधानसभा चुनाव के लिए ईवीएम और वीवीपैट की एफएलसी में लगे इंजीनियरों और कर्मचारियों के नाम तथा मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने की मांग की है। ये सभी आरोप सपा की शिकायत पर आधारित हैं।

