‘जब तक शरीर में जान है, खेलता रहूंगा…’, मोहम्मद शमी ने संन्यास की अटकलों पर तोड़ी चुप्पी
Sports News: भारतीय टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टीम में चयन, अपने प्रदर्शन और संन्यास को लेकर चल रही चर्चाओं पर खुलकर बात की है।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर उनका प्रदर्शन और फिटनेस टीम में जगह पाने के लायक है, तो उन्हें मौका मिलना चाहिए।
अगर चयनकर्ताओं को लगता है कि वह इसके योग्य नहीं हैं, तो किसी दूसरे बेहतर खिलाड़ी को चुना जाना चाहिए। शमी ने साफ कहा कि आखिर में देश की जीत सबसे ज्यादा मायने रखती है।
बातचीत के दौरान शमी ने टीम में चयन नहीं होने को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि उनके मन में किसी के प्रति जलन, गुस्सा या नफरत नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि चयन से जुड़ा सवाल उनसे क्यों पूछा जा रहा है, जबकि इस बारे में फैसला लेने का अधिकार चयनकर्ताओं के पास है।
‘जलन, गुस्सा या नफरत नहीं’, चयन पर क्या बोले शमी?
मोहम्मद शमी ने कहा कि वह एक खिलाड़ी हैं और मैदान पर प्रदर्शन करना उनका काम है। अगर उनका प्रदर्शन अच्छा है और वह फिट हैं, तो उन्हें टीम में चुना जाना चाहिए।
वहीं, अगर चयनकर्ताओं को लगता है कि वह टीम में जगह पाने के योग्य नहीं हैं, तो उन्हें बाहर रखा जा सकता है और किसी दूसरे खिलाड़ी को मौका दिया जा सकता है।
शमी ने कहा कि उनके मन में किसी के लिए जलन, गुस्सा या नफरत नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि चयन से जुड़े सवाल उन लोगों से पूछे जाने चाहिए, जिनके पास इस पर फैसला लेने का अधिकार है।

क्रिकेटरों के संन्यास को लेकर सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं पर भी शमी ने नाराजगी जताई।
उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि आजकल खिलाड़ियों के करियर और संन्यास को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रायल चलने लगा है।
कुछ लोग व्यूज और लाइक्स पाने के लिए छोटी-छोटी बातों को बड़ा मुद्दा बना देते हैं।
अपने संन्यास के सवाल पर शमी ने कहा, “भाई, मेरा नाम मोहम्मद शमी है। मैंने देश के लिए बहुत कुछ हासिल किया है। जिस दिन मुझे सुबह 6:30 या 7:00 बजे उठकर मैदान पर जाने से बोरियत होने लगेगी, उस दिन मैं खुद कह दूंगा कि बस, अब बहुत हो गया।
लेकिन अभी मैं बोर नहीं हुआ हूं। जब तक शरीर में जान है, मैं खेलता रहूंगा।”
‘संन्यास का फैसला खिलाड़ी पर छोड़ देना चाहिए’
शमी ने कहा कि जिस खिलाड़ी ने देश के लिए 15 से 17 साल तक खेला हो, मैदान पर मेहनत की हो और अपने रिकॉर्ड बेहतर किए हों, उसके संन्यास का फैसला उसी पर छोड़ देना चाहिए।
बाहर बैठकर कोई दूसरा यह तय नहीं कर सकता कि खिलाड़ी का समय खत्म हो गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के आधार पर चयन नहीं किए जाने पर उन्हें कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि किसी भी खिलाड़ी का प्रदर्शन ऊपर-नीचे हो सकता है। खिलाड़ी मशीन नहीं, इंसान होते हैं।
लेकिन संन्यास या करियर खत्म करने का फैसला खिलाड़ी का निजी निर्णय होना चाहिए।
शमी के बयान से साफ है कि वह फिलहाल संन्यास लेने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।
उन्होंने मैदान पर खेलने की अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि जब तक उनमें खेलने का उत्साह और शरीर में ताकत है, वह क्रिकेट जारी रखना चाहते हैं।
Also Read: न थकान का बहाना, न पिच का रोना, श्रेयस अय्यर ने टीम इंडिया को दिया जीत का मंत्र

