दाऊद को भारत में रहने वाला बताने पर भारत ने की यूएन रिपोर्टर की आलोचना

Sandesh Wahak Digital Desk: भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक विशेष विशेषज्ञ की रिपोर्ट पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए इसका पुरजोर विरोध किया है। उक्त रिपोर्ट में 1993 मुंबई ब्लास्ट के मुख्य आरोपी व वांछित आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को भारत में रहने वाला दर्शाया गया था। भारत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्था की साख को भारी नुकसान पहुंचाती है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने आतंकवाद व मानवाधिकार मामलों के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की जुलाई में जारी रिपोर्ट की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में गंभीर और साफ दिखाई देने वाली गलतियां मौजूद हैं, जो रिपोर्ट तैयार करने में बरती गई अयोग्यता को दर्शाती हैं। उल्लेखनीय है कि विशेष रिपोर्टर यूएन से सीधे वेतन नहीं लेते और उनसे निष्पक्ष काम की उम्मीद की जाती है।

इसी बीच, निगरानी संगठन यूएन वॉच के डेटाबेस के हवाले से सामने आया है कि सिडनी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बेन सॉल को चीन से 1,50,000 डॉलर समेत कुल 1.7 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम फंडिंग मिली है, जिसमें अमेरिका, स्विट्जरलैंड और स्पेन की संस्थाओं का योगदान भी शामिल है। भारत ने इस पद से जुड़े व्यक्तियों की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर चिंता जताई है।

वास्तविक स्थिति से परे है रिपोर्ट: भारत

बेन सॉल की रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को भारत-आधारित डी-कंपनी गिरोह का सरगना बताया गया था। इस पर रघु पुरी ने पलटवार करते हुए कहा कि यह लाइन पूरी तरह से भ्रामक तस्वीर पेश करती है। सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति के रिकॉर्ड में साफ दर्ज है कि दाऊद भारत में वांछित है और वह 2003 में अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित होने से काफी पहले भारत छोड़ भाग चुका था। भारत ने जोर देकर कहा कि दाऊद आज भी उसी देश (पाकिस्तान) में शरण लिए हुए है, जहां वैश्विक आतंकी ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ पाया गया था। दाऊद के खिलाफ भारत के आग्रह पर इंटरपोल का ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ भी जारी है।

बैठक के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने पाकिस्तान को भी आड़े हाथों लिया। रघु पुरी ने दोटूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर कही गई बातें उसके वास्तविक शासकों यानी वहां की सेना के इशारे पर किया गया संकीर्ण राजनीतिक प्रचार है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न व अखंड हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।

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