UP के 15 जिलों में पोस्टर वार, अतीक-मुख्तार की तस्वीरों के साथ अखिलेश यादव पर निशाना

UP Political Poster War: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को निशाना बनाकर लगाए गए पोस्टरों से सियासी हलचल तेज हो गई है। लखनऊ, बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर समेत प्रदेश के 15 जिलों में पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरों के साथ सपा सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाए गए हैं।

पोस्टरों में तुकबंदी वाले नारों के जरिए सपा पर परिवारवाद, जाति विशेष को तरजीह देने और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर निशाना साधा गया है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव (UP Chunav) से पहले राजनीतिक पोस्टरबाजी के जरिए एक-दूसरे को घेरने का सिलसिला भी चर्चा में है।

चाय-समोसे से लेकर परिवारवाद तक पर तंज

पोस्टरों (Poster) पर लिखा है, ‘सपाइयों का क्या भरोसा, चाय, समोसा, रस मलाई, सारे माफिया अपने भाई।’ इसके जरिए सपा पर माफिया से कथित नजदीकी का आरोप लगाते हुए निशाना साधा गया है। एक अन्य नारे में लिखा है, ‘रसगुल्ला और रसमलाई, एक जाति की सत्ता आई।’ पोस्टरों में इन नारों के जरिए अखिलेश यादव की सरकार के दौरान जाति विशेष को कथित तौर पर प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाया गया है।

पोस्टरों में 2013 की UPPCS भर्ती परीक्षा का भी जिक्र है। इनमें दावा किया गया है कि 86 में से 56 भर्तियां एक जाति विशेष के लोगों की हुई थीं। यह दावा पोस्टरों के जरिए किया गया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि इन जानकारियों से नहीं होती।

सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए पोस्टर में लिखा गया है, ‘दाल चावल और अचार, पार्टी मतलब एक परिवार।’ इसके जरिए पार्टी के नेतृत्व और परिवार की भूमिका पर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

इफ्तार पार्टी, मुजफ्फरनगर दंगे और कब्रिस्तान का बजट भी मुद्दा

पोस्टरों में अखिलेश यादव की इफ्तार पार्टी और सपा सरकार के दौरान हुए मुजफ्फरनगर दंगों का भी जिक्र है। इस संबंध में ‘दंगा, इफ्तार और बिरयानी’ का नारा लिखकर सपा सरकार के कार्यकाल पर तंज कसा गया है।

इसके अलावा, अखिलेश सरकार के दौरान कब्रिस्तानों की बाउंड्री के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने का मुद्दा उठाते हुए पोस्टर पर लिखा गया है, ‘खैनी और बनारसी पान, बजट चला गया कब्रिस्तान।’ इन नारों के जरिए तत्कालीन सरकार के बजट आवंटन और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए गए हैं।

एक अन्य पोस्टर पर ‘एक कचौड़ी, दो समोसा, गिरगिटेश का क्या भरोसा’ लिखा गया है। अलग-अलग नारों के जरिए जारी इस पोस्टरबाजी में सपा और अखिलेश यादव को कई राजनीतिक मुद्दों पर घेरने की कोशिश की गई है।

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