UP MLC चुनाव में सपा की सेंधमारी से बढ़ी टेंशन, 11 में से 6 सीटें जीतकर भी BJP परेशान
UP MLC Election Results: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी ने पिछली बार की तरह इस बार भी छह सीटें जीतीं, लेकिन लखनऊ की अपनी स्नातक सीट गंवाने और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के कुछ सीटों पर बढ़त बनाने से भाजपा की चिंता बढ़ गई है। विधानसभा चुनाव से पहले इन नतीजों को राजनीतिक माहौल के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने खुद चुनाव की कमान संभाली और आठ जनसभाएं भी कीं, इसके बावजूद पार्टी को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। टिकट घोषित करने में देरी, वोटर बनाने की तैयारी में कमी और अंदरूनी विरोध को इसकी प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।
देर से टिकट घोषित करना पड़ा भारी
भाजपा ने पांच सीटों पर 24 मई को ही प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए थे। इनमें लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी, लखनऊ स्नातक सीट से अवनीश पटेल, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लों, मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा और आगरा-अलीगढ़ स्नातक सीट से मानवेंद्र प्रताप सिंह शामिल थे। इन पांच में से चार प्रत्याशी जीत गए, जबकि अवनीश पटेल को हार का सामना करना पड़ा।
वहीं, UP MLC की छह सीटों पर प्रत्याशियों के नाम 29 सितंबर को घोषित किए गए, जबकि मतदान 23 अक्टूबर को होना था। इन सीटों पर तैयारी के लिए कम समय मिला। मेरठ स्नातक सीट से भाजपा के दिनेश गोयल और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से शिक्षक दल (शर्मा गुट) के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ही जीत दर्ज कर सके।
आगरा शिक्षक सीट से हरी किशोर तिवारी, वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह, वाराणसी शिक्षक सीट से प्रमोद कुमार मिश्रा और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर को हार मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, इन सीटों पर वोटर बनाने और जमीनी तैयारी में कमी भी पार्टी को भारी पड़ी।
आगरा से गोरखपुर तक भितरघात की शिकायतें
UP MLC चुनाव के दौरान आगरा, प्रयागराज, लखनऊ और गोरखपुर समेत कई क्षेत्रों में भाजपा को अंदरूनी विरोध का सामना करना पड़ा। प्रतापगढ़ में स्थानीय संगठन ने एक पूर्व मंत्री पर विरोधियों की मदद करने की शिकायत की। आगरा में भाजपा से जुड़े कुछ वित्तविहीन स्कूल संचालकों के सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल का समर्थन करने की बात सामने आई।
चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर सपा में गए संजय त्रिपाठी और भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के बागी रुख से भी पार्टी को नुकसान पहुंचने की चर्चा रही। इन घटनाओं ने संगठन के भीतर तालमेल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
नतीजों (UP MLC Result) के बाद भाजपा के सामने प्रबुद्ध वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने, संगठन को सक्रिय करने और पन्ना प्रमुख व्यवस्था को प्रभावी बनाने की चुनौती है। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को अपनी रणनीति और जमीनी तैयारियों की समीक्षा करनी होगी।
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