घुसपैठियों के नाम पर SIR में कटे लाखों नाम, लेकिन मिले सिर्फ 1,600 संदिग्ध विदेशी!
SIR Voter List: चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के दौरान छह राज्यों में करीब 1,600 संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान हुई। इन राज्यों में कुल 9.86 करोड़ मतदाता हैं। वहीं, मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए गए। हालांकि, कई राज्यों ने विदेशी नागरिकों का अलग रिकॉर्ड नहीं रखा और चुनाव आयोग ने भी ऐसा डेटा जुटाने का निर्देश नहीं दिया था।
कर्नाटक में सबसे ज्यादा मामले, केरल और गोवा भी पीछे नहीं
कर्नाटक में अंतिम मतदाता सूची से 99.7 लाख नाम हटाए गए और 716 विदेशी नागरिकों की पहचान हुई। बेंगलुरु नॉर्थ में 545 नेपाली नागरिकों समेत विदेशी नागरिक मिले। दक्षिण कन्नड़ में 40 लोग मिले, जिनमें नेपाल के 17, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के छह-छह, कनाडा के पांच, ब्रिटेन के दो और नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड व नॉर्वे के एक-एक नागरिक शामिल हैं। उत्तर कन्नड़ में 22 और उडुपी में 47 विदेशी नागरिकों की पहचान हुई।
केरल में करीब 500 विदेशी नागरिकता वाले लोगों के नाम मतदाता सूची में मिले। राज्य की अंतिम सूची में 2.695 करोड़ नाम थे और SIR के दौरान 8,97,211 नाम हटाए गए। गोवा में विदेशी पासपोर्ट रखने वाले 419 संदिग्ध लोगों की पहचान हुई। वहां अंतिम सूची में 10.6 लाख नाम थे और 1,27,468 नाम हटाए गए।
झारखंड में अफगानिस्तान के तीन नागरिक मिले। राज्य की मसौदा सूची में 2.21 करोड़ नाम थे, जबकि पहले 2.646 करोड़ नाम दर्ज थे। यानी करीब 43.6 लाख नाम कम हुए। अंतिम सूची 30 नवंबर को जारी होनी है।
मेघालय के SIR में नेपाली मूल के दो पुरुषों के नाम मिले, जिनकी शादी भारतीय महिलाओं से हुई थी। दोनों के नाम हटाकर मामला गृह विभाग को भेजा गया। 26 अक्टूबर की अंतिम सूची में 21.8 लाख नाम थे और 1,65,682 नाम हटाए गए। मिजोरम में विदेशी नागरिकों से जुड़ा कोई मामला सामने नहीं आया। वहां 7 सितंबर की अंतिम सूची में 8.35 लाख नाम थे।
कई राज्यों ने नहीं रखा अलग रिकॉर्ड
पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और तेलंगाना ने संदिग्ध विदेशी नागरिकों का अलग डेटा उपलब्ध नहीं होने की बात कही। पंजाब में मतदाताओं को ASDD श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ऐसे डेटा की जरूरत और व्यवहार्यता पर सवाल उठाए। दिल्ली को जिला निर्वाचन अधिकारियों से ऐसी जानकारी नहीं मिली। ओडिशा में मामले सामने आए, लेकिन संख्या दर्ज नहीं की गई।
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क किया गया, जहां SIR पूरा हो चुका था या मसौदा सूची प्रकाशित हुई थी। इनमें से 11 राज्यों ने जवाब दिया। छह ने संदिग्ध विदेशी नागरिकों की संख्या बताई, चार ने अलग डेटा नहीं होने की बात कही और ओडिशा ने संख्या बताए बिना मामले मिलने की पुष्टि की।
चुनाव आयोग के अधिकारी के अनुसार, ऐसे मामलों को ASDDO की ‘अन्य’ श्रेणी में रखा गया, लेकिन अलग राज्यवार या संयुक्त आंकड़ा नहीं जुटाया गया।
बिहार में SIR शुरू करते समय क्या कहा गया था?
24 जून 2025 को बिहार में SIR की घोषणा के दौरान आयोग ने अवैध विदेशी प्रवासियों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने को इसकी एक वजह बताया था। अन्य कारणों में शहरीकरण, पलायन, नए युवा मतदाताओं का जुड़ना और मृत्यु संबंधी जानकारी अपडेट न होना शामिल था। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि राज्यों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान और रिकॉर्ड रखने का तरीका एक जैसा नहीं है।
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