‘आँखों में उजाला, दिलों में दुआएँ’, बाराबंकी में इमाम खुमैनी फाउंडेशन की इंसानियत भरी पहल
Sandesh Wahak Digital Desk: बाराबंकी के किन्तूर क्षेत्र में एक बार फिर सेवा, करुणा और इंसानियत ने मिलकर वो मिसाल पेश की गई, जिसे शब्दों में समेटना आसान नहीं। ‘गरीबों का आँखों का नूर लौटा दो’ नामक इस मुहिम के तहत इमाम खुमैनी फाउंडेशन, काज़मी एजुकेशन एंड हेल्थकेयर सोसाइटी एवं लेप्रोसी मिशन हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष नेत्र जांच एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।
यह कैंप थाना सफदरगंज अंतर्गत दुर्जनपुर पट्टी में स्थित एडवोकेट नायाब साहब के आवास पर लगाया गया, जहां कुल 67 नेत्र रोगियों की जांच की गई। इनमें से 12 मरीज मोतियाबिंद से ग्रस्त पाए गए, जिन्हें अगली सुबह एंबुलेंस से ऑपरेशन हेतु लेप्रोसी मिशन हॉस्पिटल भेजा जाएगा।

शिविर में 35 अन्य सामान्य रोगियों की भी जांच की गई, जिनका उपचार समाजसेवी चिकित्सक डॉ. रेहान काज़मी द्वारा किया गया। डॉ. काज़मी का समर्पण और सेवा-भाव पूरे क्षेत्र में सराहना का केंद्र बना हुआ है। इस शिविर की सफलता में अहम भूमिका निभाने वाले अन्य चिकित्सकों में डॉ. ग़रीमा, मुमताज़ अहमद, ज़ाकिर अली, तालीब हुसैन और डॉ. मीज़ान ख़ान के नाम प्रमुख हैं, जिनका योगदान सराहनीय रहा।
‘किन्तूर में मुफ्त नेत्र शिविर सफल’
यह गौरतलब है कि यह इस मुहिम का पाँचवां चिकित्सा शिविर था। हर बार की तरह इस बार भी लोगों की भागीदारी ने साबित कर दिया कि जब उद्देश्य नेक हो, तो राहें खुद-ब-खुद बन जाती हैं।
इस शिविर के माध्यम से न केवल मरीजों की आँखों का इलाज हुआ, बल्कि दिलों में उम्मीद की रौशनी भी जली। यह एक सच्ची मिसाल है कि आज भी हमारे समाज में ऐसी संस्थाएँ और लोग मौजूद हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के मानवता की सेवा में जुटे हैं।
इमाम खुमैनी फाउंडेशन और उसके सभी सहयोगी संगठनों को सलाम, जिनकी बदौलत ज़रूरतमंदों की ज़िंदगी में फिर से उजाला लौट रहा है। यह महज एक मेडिकल कैंप नहीं था, बल्कि उन अनसुनी पीड़ाओं की सुनवाई थी, जिनकी आँखें तो थीं, पर उनमें रौशनी नहीं थी। आज जब वे आंखें फिर से इस दुनिया को देख सकेंगी, तो हर एक मरीज की दुआ, इस मुहिम में शामिल हर शख्स के साथ होगी।
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