साहिबजादों की शहादत की याद में लखनऊ में निकली ‘शाही सवारी’, भक्ति और वैराग्य के साथ दी गई श्रद्धांजलि
Sandesh Wahak Digital Desk: सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों की महान शहादत और माता गुजर कौर के बलिदान को याद करते हुए राजधानी के आलमबाग क्षेत्र में भव्य ‘शाही सवारी’ निकाली गई। यह धार्मिक यात्रा ‘पांच प्यारों’ की अगुवाई में आलमबाग स्थित सिंगारनगर गुरुद्वारे से शुरू होकर समर विहार कॉलोनी के सेंट्रल पार्क पर संपन्न हुई।
वीर साहिबजादों के इतिहास से कराया अवगत
समापन स्थल पर हेड ग्रंथी ज्ञानी सतवंत सिंह ने गुरु चरणों में अरदास की और संगत को साहिबजादों के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने वर्ष 1705 की उस मार्मिक घटना को याद किया जब मुगलों के हमले के दौरान सरसा नदी के किनारे गुरु जी का परिवार बिछड़ गया था।

श्रद्धालुओं को बताया गया कि कैसे छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को उनके रसोइया गंगू के लालच के कारण सरहिंद के नवाब वजीर खान ने बंदी बना लिया था। मात्र 7 और 9 वर्ष की आयु में दोनों साहिबजादों ने नवाब की कचहरी में न तो अपना धर्म बदला और न ही अन्याय के आगे शीश झुकाया।
26 दिसंबर 1705 को नवाब वजीर खान ने दोनों मासूमों को जिंदा दीवार में चिनवा दिया। ठंडे बुर्ज में कैद माता गुजर जी ने जब बच्चों की शहादत की खबर सुनी, तो उन्होंने भी अपना शरीर त्याग दिया।
वीर बाल दिवस के रूप में अमर है बलिदान
साहिबजादों के इसी अदम्य साहस और बलिदान को पूरा देश अब ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाता है। आलमबाग में आयोजित इस शाही सवारी में भारी संख्या में सिख समुदाय के लोगों ने कीर्तन और गुरुवाणी के साथ अपनी श्रद्धा अर्पित की।
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