प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को थमाया नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब
Prayagraj News: संगम की रेती पर चल रहे आस्था के समागम यानी माघ मेले में श्रद्धा के बीच अब एक नया विवाद पैदा हो गया है। मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच तल्खी इस कदर बढ़ गई है कि प्रशासन ने अब सीधे उनके शंकराचार्य पद की वैधानिकता पर ही सवाल उठा दिए हैं। मेला प्राधिकरण ने स्वामी जी को नोटिस जारी कर पूछा है कि वे अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का इस्तेमाल क्यों और किस आधार पर कर रहे हैं।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ऋषिराज की ओर से जारी इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक पुराने मामले (वर्ष 2020) का हवाला दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता या पट्टाभिषेक को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं मिलती, तब तक खुद को शंकराचार्य लिखना अदालत के आदेश की अवहेलना माना जा सकता है। प्रशासन ने स्वामी जी से उनके शिविर में लगे उस बोर्ड पर आपत्ति जताई है, जिस पर उन्हें ‘ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य’ दर्शाया गया है।
प्रशासन ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए महज 24 घंटे का समय दिया है। उनसे इस पद से जुड़े प्रमाण मांगे गए हैं। यह नोटिस ऐसे समय में आया है जब पहले से ही स्नान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था।
स्नान विवाद से शुरू हुई थी तकरार
बता दें कि दो दिन पहले माघ पूर्णिमा के अवसर पर संगम स्नान को लेकर प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच ठन गई थी। आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें स्नान करने से रोका, जिसके विरोध में वे बिना स्नान किए ही लौट आए और अपने शिविर के बाहर ही अनशन पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। अब इस नोटिस ने आग में घी डालने का काम किया है।
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