बिहार के बाद पूरे देश में होगा वोटर लिस्ट का महा-सत्यापन, चुनाव आयोग ने किया स्पष्ट
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने वोटर वेरिफिकेशन को लेकर एक बड़ा आदेश जारी किया है। ECI ने साफ किया है कि देश भर में मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन शुरू किया जाएगा, और इसकी शुरुआत बिहार से होगी, जहाँ इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं।
निर्वाचन आयोग ने यह आदेश 24 जून को जारी किया था, जिसकी जानकारी शुक्रवार (25 जुलाई, 2025) को दी गई है।
क्या है ECI का नया आदेश
ECI के मुताबिक, यह कदम संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (RPA 1950) के तहत उठाया गया है। आयोग का मानना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का सटीक होना बेहद ज़रूरी है। जन प्रतिनिधि अधिनियम 1950 और 1960 के मतदाता पंजीकरण नियमों (RER, 1960) के तहत मतदाता सूची बनाने की प्रक्रिया और योग्यता तय की जाती है।
क्यों ज़रूरी है यह महा-सत्यापन
आयोग ने बताया कि पहले भी 1952 से 2004 तक कई बार देश के अलग-अलग हिस्सों में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण किया गया था। बिहार में आखिरी बड़ा पुनरीक्षण 2003 में हुआ था। इस नए पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी योग्य नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और कोई भी पात्र व्यक्ति बाहर न छूटे। संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, 18 साल या उससे ज़्यादा उम्र के भारतीय नागरिक, जो किसी कानून से अयोग्य न हों, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के हकदार हैं।
आयोग ने पिछले 20 सालों में मतदाता सूची में बड़े बदलाव, शहरीकरण, और लोगों के एक जगह से दूसरी जगह पलायन को देखते हुए इस कदम को ज़रूरी माना है। अक्सर लोग शिक्षा, रोज़गार या अन्य कारणों से नई जगह पर जाकर अपना नाम तो जुड़वा लेते हैं, लेकिन पुरानी जगह से नाम नहीं हटवाते। इससे मतदाता सूची में दोहरे नाम (Duplicate Entries) की समस्या बढ़ जाती है, जिससे सूची की शुद्धता प्रभावित होती है। ECI का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि केवल भारतीय नागरिक ही सूची में शामिल हों।
बिहार में पहले शुरू होगा अभियान, जानें पूरी प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने बताया है कि पूरे देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन शुरू होगा, लेकिन क्योंकि बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए यहाँ यह अभियान पहले शुरू किया जा रहा है। बाकी देश के लिए इसका समय-कार्यक्रम बाद में जारी होगा।
ECI के निर्देश कुछ इस प्रकार हैं
आधार तारीख 2003: बिहार में आखिरी गहन संशोधन 2003 में हुआ था, इसलिए 1 जनवरी, 2003 की मतदाता सूची को पात्रता और नागरिकता का आधार माना जाएगा।
दस्तावेजों की अनिवार्यता: जिनका नाम 2003 की सूची में नहीं है, उन्हें मतदाता सूची में शामिल होने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित दस्तावेज़ जमा करने होंगे।
गणना फॉर्म अनिवार्य: 25 जुलाई, 2025 तक सभी मौजूदा मतदाताओं को पहले से भरा हुआ गणना फॉर्म (Enumeration Form) उपलब्ध कराया जाएगा। ड्राफ्ट मतदाता सूची में केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम शामिल होंगे, जिन्होंने यह फॉर्म भरा होगा।
नाम हटने का खतरा: यह एक गहन संशोधन है, इसलिए जो मतदाता फॉर्म जमा नहीं करेंगे, उनके नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। 25 जुलाई, 2025 से पहले किसी भी मतदाता का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों और नागरिकों के लिए निर्देश
निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी वास्तविक मतदाता, खासकर बुजुर्ग, बीमार, दिव्यांग, गरीब और अन्य कमज़ोर वर्गों को परेशान न किया जाए। उन्हें हर संभव सहायता दी जाए, जिसमें स्वयंसेवकों की मदद भी शामिल है।
आयोग ने यह भी कहा कि ERO/AERO बिना उचित जांच और संबंधित व्यक्ति को अवसर दिए बिना ड्राफ्ट सूची से किसी का नाम नहीं हटाएंगे। अगर कोई व्यक्ति ERO के फैसले से असंतुष्ट है, तो वह जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास अपील कर सकता है। DM के आदेश से भी संतुष्टि न मिलने पर, व्यक्ति 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास दूसरी अपील दायर कर सकता है।
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