Smriti Mandhana: क्रिकेट के बाद अब बच्चों के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगी स्मृति मंधाना, सचिन तेंदुलकर ने किया स्वागत
Sports News: भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना ने क्रिकेट के मैदान से बाहर बच्चों के अधिकारों और लड़कियों को समान अवसर दिलाने की दिशा में नई पहल की है।
वह यूनिसेफ इंडिया से सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में जुड़ गई हैं। इस भूमिका के जरिए वह बच्चों के अधिकारों, लैंगिक समानता और लड़कियों को अपने सपने पूरे करने के लिए प्रोत्साहित करने से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाएंगी।
इस मौके पर महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने स्मृति मंधाना का यूनिसेफ इंडिया परिवार में स्वागत किया और उनका हौसला बढ़ाया।
सचिन तेंदुलकर ने स्मृति का बढ़ाया हौसला
सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया पर स्मृति मंधाना का स्वागत करते हुए लिखा कि वह मैदान पर लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं और उन्हें भरोसा है कि मैदान के बाहर भी बच्चों के अधिकारों के लिए एक मजबूत आवाज बनेंगी।
सचिन लंबे समय से बच्चों के कल्याण और शिक्षा से जुड़े प्रयासों का समर्थन करते रहे हैं।
स्मृति के यूनिसेफ से जुड़ने को बच्चों के अधिकारों और समान अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
बचपन को याद कर क्या बोलीं स्मृति मंधाना?
यूनिसेफ से जुड़ने के बाद स्मृति मंधाना ने अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि नौ साल की उम्र में वह अपने भाई के साथ पहली बार क्रिकेट ट्रायल में शामिल हुई थीं।

उनके पिता ने क्रिकेट खेलने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया, जबकि उनकी मां पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाए रखने पर ध्यान देती थीं।
स्मृति ने कहा कि उन्होंने अपना रास्ता खुद चुना और आज गर्व से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
उनके मुताबिक, हर लड़की को अपना रास्ता चुनने, सपने पूरे करने और अपनी काबिलियत पहचानने की आजादी मिलनी चाहिए।
लड़की होना कभी भी उसकी तरक्की में रुकावट नहीं बनना चाहिए।
क्रिकेट के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाएंगी स्मृति
स्मृति मंधाना का यह कदम खेल के जरिए सामाजिक बदलाव को बढ़ावा देने की दिशा में अहम है।
यूनिसेफ के साथ जुड़कर वह बच्चों के अधिकारों, लड़कियों की शिक्षा और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज उठाएंगी।
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