दिल्ली-यूपी के बाद अब बिहार…क्या NDA फिर चलेगी पुरानी रणनीति?

महागठबंधन ने तेजस्वी यादव पर लगाया दांव, एनडीए ने पत्ते रखे बंद

Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार में ज्यों-ज्यों मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, सियासी गर्माहट तेज हो रही है। मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं। राजद-कांग्रेस और वीआईपी के महागठबंधन ने मुख्यमंत्री पद के लिए लालू पुत्र तेजस्वी यादव को दावेदार बनाया है, वहीं एनडीए (भाजपा-जदयू-लोजपा रामविलास) ने अभी तक इस मामले में अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

इससे सियासी गलियारों में इस बात पर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि अगर एनडीए सत्ता में आती तो मुख्यमंत्री कौन होगा। हालांकि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी दबी जुबान से ही सही नीतीश कुमार के नाम की ओर इशारा कर चुके हैं। यही नहीं गांवों की चौपालों और नुक्कड़ों में अब केवल यही चर्चा का विषय है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। लोगों का यह भी कहना है कि एनडीए का कोई भरोसा नहीं, कोई नया चेहरा भी सामने ला सकती है।

अगले सीएम के नाम की चर्चाएं तेज

बिहार में 243 विधानसभा सीटों के लिए 6 और 11 नवंबर को मतदान होना है। 14 नवंबर को मतगणना होनी है। ऐसे में लोगों के दिलों में अगले सीएम पद के लिए उत्सुकता होना तय है। शहरों और गांवों में अगले सीएम के दावेदारों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबकी अपनी-अपनी गणित है। उधर महागठबंधन ने तेजस्वी यादव पर दांव भी लगा दिया है। एनडीए ने इस पर अभी चुप्पी साध रखी है। वैसे भी एनडीए ने लगभग सभी चुनावों में यही रुख अपनाया है। उसने चुनाव के नतीजे आने के बाद ही अपने पत्ते खोले हैं। इसमें कभी-कभी ऐसा भी होता है कि चर्चाओं से परे कोई नाम उजागर हो जाता है। ऐसा पहले उत्तर प्रदेश, उसके बाद पंजाब के विधानसभा चुनाव में देखा भी जा चुका है।

क्या कहती है सियासी गणित?

राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलौत का कहना है कि महागठबंधन ने सोच समझ कर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का दावेदार चुना है। उनका कहना है कि एनडीए के पास मुख्यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा नहीं है। उसके पास पैसा है और महागठबंधन के पास जनता का भरोसा।  वहीं बिहार कांग्रेस के प्रभारी रहे कृष्णा अल्लावेरु का कहना है कि हमने तो तेजस्वी को सीएम पद का उम्मीदवाद घोषित कर दिया, अब भाजपा बताए कि उनका चेहरा कौन है।

उधर एक रैली के दौरान जब गृह मंत्री अमित शाह से पत्रकारों ने जब इस संबंध में पूछा तो उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद तय करेंगे। इस बात का लोगों ने अलग-अलग मतलब निकाला। किसी ने कहा कि इससे साफ जाहिर हो रहा है कि नीतीश अब भाजपा के चेहरे नहीं रहे, तो किसी ने कहा कि कोई नया चेहरा सामने आ सकता है। नतीजे चाहे जो भी हों, एनडीए अपनी पुरानी परिपाटी पर ही चल रही है। अमित शाह ने इस बात के संकेत भी दे दिए हैं।

दूसरी ओर मुंगेर जिले की तारापुर सीट से एनडीए प्रत्याशी व उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कहना है कि नीतीश कुमार सीएम हैं और रहेंगे। उनका कहना है कि भले नीतीश की विचारधारा भिन्न हो, वे एनडीए में शामिल सभी दलों को स्वीकार्य हैं। नीतीश ने भी हमेशा एनडीए का सहयोग किया है।

रिपोर्ट: राज कृष्ण पाण्डेय

 

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